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मुंबई। महंगाई की मार से जूझ रही जनता पर जल्दी ही एक नया बोझ पड़ने वाला है। अब एफसीआई यानी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया खुले बाजार में गेहूं पर सरकारी टैक्स और ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़कर बेचेगा। इससे देश भर में गेहूं के दाम कम से कम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ जाएंगे, जिसका सीधा असर आम आदमी की रसोई पर पड़ेगा। पहले से मशक्कत करके जी रहे आम लोग इतनी महंगाई में सिर्फ दाल रोटी ही खा पा रहे हैं और अब रोटी भी महंगी होने जा रही है।
एफसीआई की ओपन मार्केट सेल स्कीम ओएमएसएस के तहत 65 लाख टन गेहूं का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। ये गेहूं देश के 19 राज्यों के लिए आवंटित किया गया है, जिनकी कीमत अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग है। ये कीमत 1446 रुपये से लेकर 1750 रुपये प्रति क्विंटल तक तय की गई है। आटा मिलें एफसीआई की इस नई नीति का विरोध कर रही हैं।
पंजाब में गेहूं पर 5.5 फीसदी वैट लगता है। ये वैट एफसीआई गेहूं की खरीद करते वक्त राज्य सरकार को दे चुकी है और इसे अपनी घोषित कीमतों में भी जोड़ चुकी है। मिल मालिकों को ये वैट अलग से देने को कहा गया है,जबकि एफसीआई को गेहूं की बिक्री के बाद पंजाब सरकार की तरफ से इनपुट क्रेडिट मिलना है। ऐसे में मिल मालिक एफसीआई से खरीद कीमत से वैट हटाने की मांग कर रहे हैं,ताकि गेहूं की कीमत में तेज बढ़ोतरी ना आए।
नवंबर महीने के पहले भी फूड कोर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने गेंहू की कीमतों में इजाफा किया था। सूत्रों की मानें तो आटा मिलों में अभी आटे की पूर्ति नहीं है और मांग ज्यादा होने की वज़ह से बाज़ार में संतुलन नहीं बैठाया जा सका है। मांग और पूर्ति के कारण पैदा हुई इस खाई के कारण बाज़ार में आटे की कीमतों में 30 रुपए तक का उछाल आया था। इस महीने के पहले हफ्ते आटे की कीमत पर्ति क्विंटल 1730 रुपए तक पहुंच गयी थी।
वहीं कृषि और खाद्य भंडारण मंत्री शरद पवार ने भी गेंहू की कीमत में बढ़ोतरी की संभावना बतायी थी। उन्होने कहा था कि वह गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की मांग के पक्ष में है। इस मुद्दे पर वह कृषि लागत और मूल्य आयोग के साथ एक बैठक भी लेगें।
गेंहू की पैदावार सबसे ज्यादा पंजाब राज्य में ही होती है और इस साल पंजाब के कृषि क्षेत्र में सूखे जैसे हालात थे। जिसके लिए राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से 5,112 करोड़ रुपए की राशी की मांग की थी। भंडारण की बात करें तो केन्द्र सरकार का मानना है कि भंडारण की समस्या सुलझाने के लिए सरकार ने एक योजना बनायी है जिसका राज्य वार पालन हो रहा है। परंतु महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में जमीन की उंची कीमतों के कारण यह सफल नहीं हो पाया है।
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