14 अगस्त 2012
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देश को आज़ाद हुए भले ही 65 वर्ष बीत गए हों लेकिन देश आर्थिक स्तर पर आज भी आज़ाद नहीं हुआ है। कमरतोड़ महंगाई, महंगे बैंक लोन और हर तरफ छाए भ्रष्टाचार ने आम इंसान को तोड़कर रख दिया है। आज़ाद भारत आज भी कमरतोड़ महंगाई और भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ा हुआ है।
कमजोर मानसून ने खाना-पीना महंगा किया!
कम बारिश के चलते आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ रही है। खाने-पीने की हर चीज महंगी हो गई है। बारिश नहीं हो रही है इसलिए जून में खाद्य महंगाई दर भी कम नहीं हुई। आलू के दाम पिछले साल के मुकाबले 75 फीसदी बढ़ गए हैं। इसके अलावा हर खाने-पीने की चीजों की कीमत में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। अब तो सरकार भी कम बारिश से चिंता में पड़ गई है।
देखें, आम आदमी के लिए क्या-क्या हुआ महंगा?
1 जुलाई से आम आदमी पर महंगाई की एक और मार पड़ गई है। बजट में हुए ऐलान के मुताबिक 1 जुलाई से सर्विस टैक्स 10 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गया है। इससे टैक्सी का किराया, हवाई जहाज का किराया, होटल में खाना-पीना इत्यादि सब कुछ महंगा हो गया है। लगभग रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी लगभग हर चीज सर्विस टैक्स की लिस्ट में डाल दी गई है। आप भी देखें वो क्या है जिस पर सर्विस टैक्स की मार पड़ी है।
महंगी सब्जियों ने बढ़ाई आम आदमी की परेशानी
बढ़ती महंगाई की वजह से सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं जिससे खाना पीना मुश्किल हो गया है।
घर के बजट पर पड़ी महंगाई की मार
अब आप साबुन, शैंपू, कोला ड्रिंक्स और नूडल्स जैसी चीजों की ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हो जाइए। बजट के बाद सभी एफएमसीजी कंपनियां या तो अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा चुकी हैं या बढ़ाने की तैयारी में हैं।बजट में एक्साइज ड्यूटी को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया है, जिसके बाद सभी एफएमसीजी उत्पाद 2-10 फीसदी तक महंगे होने जा रहे हैं।नेस्ले ने मैगी के दाम 6.25-8.5 फीसदी तक बढ़ाए हैं। वहीं, इमामी ने 9 मिलीलीटर झंडु बाम की कीमत 23 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दी है। इसके अलावा गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ब्रिटानिया, आईटीसी फूड्स, कोका कोला, ज्योति लेबोरेट्रीज और डंकंस टी भी दाम बढ़ाने की तैयारी कर चुकी है।
महंगाई के मोर्चे पर सरकार की मुश्किलें बढ़ी
भारी भरकम सब्सिडी चुकाने के बावजूद सरकार महंगाई पर काबू नहीं कर पा रही है। देश में इस साल चावल और गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। लेकिन इस खबर से भी कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि दूसरी तरफ दाल, खाने के तेल और मोटे अनाज का उत्पादन कम होने की वजह से घर का बजट बिगड़ सकता है। दाल का उत्पादन 12 लाख टन तो तिलहन का उत्पादन 24 लाख टन कम होने की आशंका है। कई तरह के फूड प्रोडक्ट बनाने में मक्का, ज्वार-बाजरा जैसे जिन मोटे अनाज का इस्तेमाल होता है उनका उत्पादन भी 19 लाख टन कम हुआ है।
महंगाई के लिए राज्यों के मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं
केंद्र ने एक बार फिर बढ़ती कीमतों का ठीकरा राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सिर फोड़ दिया है। केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा है कि सब्जी और खाने-पीने के सामान से लेकर पेट्रोल और गैस के दाम मुख्यमंत्री बढ़ा रहे हैं और जिम्मेदारी मनमोहन सरकार के सिर पर थोपी जा रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने कहा है कि महंगाई के लिए पूरी तरह मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। पेट्रोल, डीजल, गैस पर 30 फीसदी तक टैक्स वसूला जा रहा है। मुख्यमंत्री सूबे का खजाना भर रहे हैं और जिम्मेदारी केंद्र पर थोपी जा रही है। यह नहीं चलेगा। पिछले महीने पांच राज्यों ने पेट्रोल पदार्थों पर टैक्स कम किया था। इससे केरल में पेट्रोल 70 पैसे और उत्तराखंड में पेट्रोल 78 पैसे सस्ता हो गया।
क्रिसिल ने भारत का जीडीपी अनुमान 1% घटाया
नये केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के अर्थव्यवस्था को जल्दी ही फिर से पटरी पर लाने के लिए रोडमैप प्रस्तुत करने के महज एक दिन बाद ही साख निर्धारण करने वाली संस्था क्रिसिल ने भारत का चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमान पहले के 6.5 प्रतिशत के मुकाबले घटाकर साढ़े पांच प्रतिशत कर दिया है। क्रिसिल ने आज अपनी नवीनतम रिपोर्ट में जीडीपी अनुमान घटाते हुए कहा है कि कमजोर मानसून ने सरकार की वित्तीय स्थिति आगे और खराब हो सकती है। दो माह पहले जून में क्रिसिल ने जीडीपी में साढे छह प्रतिशत वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया था।
नहीं घटीं ब्याज दरें
आरबीआई ने क्रेडिट पॉलिसी के तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। ऐसे में आरबीआई के फैसले के बाद रेपो रेट 8 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 7 फीसदी पर कायम रहेगा। वहीं सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये 4.75 फीसदी पर कायम है। आरबीआई ने हालांकि एसएलआर 24 फीसदी से घटाकर 23 फीसदी कर दिया है, जो 11 अगस्त से लागू होगा। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2013 में महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी दर का अनुमान 7.3 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया है।
प्रधानमंत्री: बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। प्रधानमंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, प्रधानमंत्री सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन, पुलक चटर्जी, कौशिक बसु और वित्त मंत्रालय के तमाम सचिवों के साथ मुलाकात की। दिन भर चले बैठकों के दौर में प्रधानमंत्री ने इंश्योरेंस, म्युचुअल फंड इंडस्ट्री पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री ने मल्टीब्रैंड रिटेल में एफडीआई और फ्यूल सब्सिडी पर भी विस्तार से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि निवेश का माहौल सुधारने के लिए टैक्स व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने बैठक में शामिल सभी अधिकारियों से कहा कि वो इकोनॉमी को दुरुस्त करने के उपाय सुझाएं।
आप इस बढ़ती महंगाई के लिए सबसे ज्यादा किसे जिम्मेदार मानेंगे? हमें बताएं
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देश को आज़ाद हुए भले ही 65 वर्ष बीत गए हों लेकिन देश आर्थिक स्तर पर आज भी आज़ाद नहीं हुआ है। कमरतोड़ महंगाई, महंगे बैंक लोन और हर तरफ छाए भ्रष्टाचार ने आम इंसान को तोड़कर रख दिया है। आज़ाद भारत आज भी कमरतोड़ महंगाई और भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ा हुआ है।
कमजोर मानसून ने खाना-पीना महंगा किया!
कम बारिश के चलते आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ रही है। खाने-पीने की हर चीज महंगी हो गई है। बारिश नहीं हो रही है इसलिए जून में खाद्य महंगाई दर भी कम नहीं हुई। आलू के दाम पिछले साल के मुकाबले 75 फीसदी बढ़ गए हैं। इसके अलावा हर खाने-पीने की चीजों की कीमत में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। अब तो सरकार भी कम बारिश से चिंता में पड़ गई है।
देखें, आम आदमी के लिए क्या-क्या हुआ महंगा?
1 जुलाई से आम आदमी पर महंगाई की एक और मार पड़ गई है। बजट में हुए ऐलान के मुताबिक 1 जुलाई से सर्विस टैक्स 10 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गया है। इससे टैक्सी का किराया, हवाई जहाज का किराया, होटल में खाना-पीना इत्यादि सब कुछ महंगा हो गया है। लगभग रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी लगभग हर चीज सर्विस टैक्स की लिस्ट में डाल दी गई है। आप भी देखें वो क्या है जिस पर सर्विस टैक्स की मार पड़ी है।
महंगी सब्जियों ने बढ़ाई आम आदमी की परेशानी
बढ़ती महंगाई की वजह से सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं जिससे खाना पीना मुश्किल हो गया है।
घर के बजट पर पड़ी महंगाई की मार
अब आप साबुन, शैंपू, कोला ड्रिंक्स और नूडल्स जैसी चीजों की ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हो जाइए। बजट के बाद सभी एफएमसीजी कंपनियां या तो अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा चुकी हैं या बढ़ाने की तैयारी में हैं।बजट में एक्साइज ड्यूटी को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया है, जिसके बाद सभी एफएमसीजी उत्पाद 2-10 फीसदी तक महंगे होने जा रहे हैं।नेस्ले ने मैगी के दाम 6.25-8.5 फीसदी तक बढ़ाए हैं। वहीं, इमामी ने 9 मिलीलीटर झंडु बाम की कीमत 23 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दी है। इसके अलावा गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ब्रिटानिया, आईटीसी फूड्स, कोका कोला, ज्योति लेबोरेट्रीज और डंकंस टी भी दाम बढ़ाने की तैयारी कर चुकी है।
महंगाई के मोर्चे पर सरकार की मुश्किलें बढ़ी
भारी भरकम सब्सिडी चुकाने के बावजूद सरकार महंगाई पर काबू नहीं कर पा रही है। देश में इस साल चावल और गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। लेकिन इस खबर से भी कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि दूसरी तरफ दाल, खाने के तेल और मोटे अनाज का उत्पादन कम होने की वजह से घर का बजट बिगड़ सकता है। दाल का उत्पादन 12 लाख टन तो तिलहन का उत्पादन 24 लाख टन कम होने की आशंका है। कई तरह के फूड प्रोडक्ट बनाने में मक्का, ज्वार-बाजरा जैसे जिन मोटे अनाज का इस्तेमाल होता है उनका उत्पादन भी 19 लाख टन कम हुआ है।
महंगाई के लिए राज्यों के मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं
केंद्र ने एक बार फिर बढ़ती कीमतों का ठीकरा राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सिर फोड़ दिया है। केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा है कि सब्जी और खाने-पीने के सामान से लेकर पेट्रोल और गैस के दाम मुख्यमंत्री बढ़ा रहे हैं और जिम्मेदारी मनमोहन सरकार के सिर पर थोपी जा रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने कहा है कि महंगाई के लिए पूरी तरह मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। पेट्रोल, डीजल, गैस पर 30 फीसदी तक टैक्स वसूला जा रहा है। मुख्यमंत्री सूबे का खजाना भर रहे हैं और जिम्मेदारी केंद्र पर थोपी जा रही है। यह नहीं चलेगा। पिछले महीने पांच राज्यों ने पेट्रोल पदार्थों पर टैक्स कम किया था। इससे केरल में पेट्रोल 70 पैसे और उत्तराखंड में पेट्रोल 78 पैसे सस्ता हो गया।
क्रिसिल ने भारत का जीडीपी अनुमान 1% घटाया
नये केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के अर्थव्यवस्था को जल्दी ही फिर से पटरी पर लाने के लिए रोडमैप प्रस्तुत करने के महज एक दिन बाद ही साख निर्धारण करने वाली संस्था क्रिसिल ने भारत का चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमान पहले के 6.5 प्रतिशत के मुकाबले घटाकर साढ़े पांच प्रतिशत कर दिया है। क्रिसिल ने आज अपनी नवीनतम रिपोर्ट में जीडीपी अनुमान घटाते हुए कहा है कि कमजोर मानसून ने सरकार की वित्तीय स्थिति आगे और खराब हो सकती है। दो माह पहले जून में क्रिसिल ने जीडीपी में साढे छह प्रतिशत वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया था।
नहीं घटीं ब्याज दरें
आरबीआई ने क्रेडिट पॉलिसी के तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। ऐसे में आरबीआई के फैसले के बाद रेपो रेट 8 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 7 फीसदी पर कायम रहेगा। वहीं सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये 4.75 फीसदी पर कायम है। आरबीआई ने हालांकि एसएलआर 24 फीसदी से घटाकर 23 फीसदी कर दिया है, जो 11 अगस्त से लागू होगा। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2013 में महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी दर का अनुमान 7.3 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया है।
प्रधानमंत्री: बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। प्रधानमंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, प्रधानमंत्री सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन, पुलक चटर्जी, कौशिक बसु और वित्त मंत्रालय के तमाम सचिवों के साथ मुलाकात की। दिन भर चले बैठकों के दौर में प्रधानमंत्री ने इंश्योरेंस, म्युचुअल फंड इंडस्ट्री पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री ने मल्टीब्रैंड रिटेल में एफडीआई और फ्यूल सब्सिडी पर भी विस्तार से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि निवेश का माहौल सुधारने के लिए टैक्स व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने बैठक में शामिल सभी अधिकारियों से कहा कि वो इकोनॉमी को दुरुस्त करने के उपाय सुझाएं।
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