08 फरवरी 2012
वार्ता
नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज कहा कि वर्तमान में देश उच्च मुद्रास्फिती के दबाव से बाहर हो गया है।
श्री मुखर्जी ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के कृषि एवं खाद्य आपूर्ति मंत्रियों एवं सचिवों के ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुये कहा कि बंपर कृषि पैदावार होने से वर्तमान में देश उच्च मुद्रास्फिती के दबाव से बाहर हो गया है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में क्रय शक्ति में सुधार होने से उच्च आर्थिक विकास दर हासिल कर ली गयी लेकिन कुछ विशेष वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढने से अर्थव्यवस्था पर उच्च मुद्रास्फिती का दबाव बना था।
उन्होंने 12वीं पंचवर्षीय योजना का उल्लेख करते हुये कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर वर्ष 2007 और 2010 के बीच औसत श्रम दर में 16 प्रतिशत की बढोतरी हुयी है। आंध्र प्रदेश में यह दर 42 प्रतिशत और ओडीशा में 33 प्रतिशत रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश में यह क्रमशः 19 और 20 प्रतिशत रहा। इसके मद्देनजर लोगों की क्रय शक्ति बढी।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सप्ताहों तक लगातार खाद्य मुद्रास्फिती शून्य से नीचे बनी रही और थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फिती की दर भी घटकर 7.5 प्रतिशत के करीब आ गयी है। विश्लेषकों ने इसके जनवरी में सात प्रतिशत से नीचे आने का अनुमान लगाया है।
वार्ता
नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज कहा कि वर्तमान में देश उच्च मुद्रास्फिती के दबाव से बाहर हो गया है।
श्री मुखर्जी ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के कृषि एवं खाद्य आपूर्ति मंत्रियों एवं सचिवों के ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुये कहा कि बंपर कृषि पैदावार होने से वर्तमान में देश उच्च मुद्रास्फिती के दबाव से बाहर हो गया है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में क्रय शक्ति में सुधार होने से उच्च आर्थिक विकास दर हासिल कर ली गयी लेकिन कुछ विशेष वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढने से अर्थव्यवस्था पर उच्च मुद्रास्फिती का दबाव बना था।
उन्होंने 12वीं पंचवर्षीय योजना का उल्लेख करते हुये कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर वर्ष 2007 और 2010 के बीच औसत श्रम दर में 16 प्रतिशत की बढोतरी हुयी है। आंध्र प्रदेश में यह दर 42 प्रतिशत और ओडीशा में 33 प्रतिशत रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश में यह क्रमशः 19 और 20 प्रतिशत रहा। इसके मद्देनजर लोगों की क्रय शक्ति बढी।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सप्ताहों तक लगातार खाद्य मुद्रास्फिती शून्य से नीचे बनी रही और थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फिती की दर भी घटकर 7.5 प्रतिशत के करीब आ गयी है। विश्लेषकों ने इसके जनवरी में सात प्रतिशत से नीचे आने का अनुमान लगाया है।
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