वार्ता
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वॉशिंगटन। अमेरिका में नजदीक आ रहे राष्ट्रपति चुनावों के बीच राजनेताओं का प्रवासी भारतीय समुदाय का मजाक उड़ाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसी क्रम में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जो बिदेन ने कल एक सभा को संबोधित करते हुए भारतीयों के अंग्रेजी उच्चारण की नकल उतारकर मजाकिया लहजे में उसका इस्तेमाल किया।
बिदेन भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ इससे पहले भी नकारात्मक टिप्पणियां करते रहे हैं।
सिख समुदाय ने कहा, जे लेनो माफी मांगें
अमेरिका के ‘न्यूयार्क डेली’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि बिदेन कल हैंपशायर में एक कंपनी के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बीपीओ कॉल सेंटरों के मसले पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने विदेशी मुल्कों द्वारा अमेरिकी कॉल सेंटर कर्मचारियों की नौकरियों छीनने संबंधी बयान देते हुए दो बार भारतीय उच्चारण का मजाकिया शैली में इस्तेमाल किया। यह सब कुछ तीस सेकंड के अंदर अंदर हो गया।
हालांकि एक मैगजीन ने दावा किया है कि बिदेन ने इस दौरान संभावित रूप से एक भारतीय कॉल सेंटर कर्मचारी की उच्चारण शैली का नहीं, बल्कि एक रूसी कॉल सेंटर कर्मचारी की उच्चारण शैली का इस्तेमाल किया था। बिदेन ने अपने संबोधन में भारत का जिक्र भी किया था।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले अमेरिका के प्रसिद्ध टेलीविजन कार्यक्रम ‘द टूनाइट शो’ में एंकर जे लेनो ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तस्वीर दिखाते हुए मजाकिया लहजे में कहा था कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के संभावित उम्मीदवार मिट रोमनी का ग्रीष्मकालीन आरामगाह हो सकता है।
स्वर्ण मंदिर सिखों का पवित्र स्थल है। भारत सरकार ने सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका के तहत इस मामले पर तुरंत कदम उठाते हुए अमेरिका सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। अमेरिका ने इस मामले में लेनो के बचाव में उतरते हुए कहा था कि अमेरिकी सरजमीं पर लेनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत ऐसा करने का अधिकार है।
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22 मई 2012
Feb 01, 2012
Americans ka dimag satak gaya hai, aur ho v kyun nahin, lagatar back hote jaa rahe hain, puri duniya main sirf indian hi aise hain jo dusre deshon ko takkar de sakte hain, aur ye baat puri duniya samajhne lagi hai, isiliye hame mentaly defeat karne ki soch rahe hain, per hamare irade v pakke hain, aur ye baat hum duniya ko dikha denge.
Vinay Varanasi
Jan 31, 2012
किसी की मज़ाक उड़ाने से हम भारतीयो के शान मे कोई फ्रॅक नही पड़ता है, पर इसका ज़वाव
कूटनीति के तहत मिलना चाहिए .
ajit thakur Muzaffarpur
Jan 29, 2012
हम १०० करोड़ केबल आकड़ो के लिए हैं / हम पर जो चाहे जब चाहे टिप्पणी कर सकता है/ यादा यादा ही धर्मास्या गिलनीर भावती भारथ ./ चिंता की कोई बात नहीं अंत मे भगवान तो हैं ही बस लगता है अभी उनको नीचे लाने जितना अपराध और पाप पूरा नहीं हुआ है
c s jain Bangalore
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