13 फरवरी 2013
आईबीएन 7
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लखनऊ। अखिलेश भले ही शाबाशी दें। पीठ ठोंके। लेकिन ऐसे कई अफसर हैं जिन्होंने अपना काम ठीक तरीके से नहीं निभाया। अगर वो अपनी जिम्मेदारी निभाते तो शायद 36 लोगों की मौत नहीं होती। हादसे के बाद भी अफसरों और सरकार का रवैया बेहद उदासीन था। दरअसल आईबीएन7 ने अपनी तफ्तीश में 10 ऐसे चेहरे तलाशे हैं जिनपर लापरवाही का आरोप बनते हैं।
आरोपी नंबर- 10: जीआरपी इलाहाबाद के इंस्पेक्टर- वशिष्ठ यादव
वशिष्ठ यादव पर जिम्मेदारी थी रेल यात्रियों की हिफाजत की, उनको नियंत्रित रखने की। लेकिन इनकी एक गलती ने ले ली 36 लोगों की जान। आरोप है कि इनके जवानों ने लाठियां भांजी। नतीजा, भगदड़ मची जो जानलेवा साबित हुई।
आरोपी नंबर- 9: डीआईजी रेलवे- लालजी शुक्ला
लालजी शुक्ला को मेले के नोडल अफसर के तौर पर तभी से स्टेशन पर होना चाहिए था, जब यात्री स्नान के बाद स्टेशन पहुंचने लगे। लेकिन आरोप है कि ये साहब घटना होने के करीब तीन घंटे बाद मौके पर पहुंचे और वो भी ये सफेद झूठ बोलते हुए कि घटना पुल की रेलिंग टूटने के चलते हुई। खुद को बचाने की इनकी फितरत के चलते आधी रात तक ये भ्रम बना रहा कि आखिर हादसा कैसे हुआ।
आरोपी नंबर- 8: आईजी इलाहाबाद- आलोक शर्मा
आलोक शर्मा को ये देखना चाहिए था कि कुंभ क्षेत्र से लोगों को बारी बारी से छोड़ा जाए, एक बारगी नहीं। इस चूक के चलते एक साथ हजारों लोग स्टेशन पर जा पहुंचे और हादसा सामने आया।
आरोपी नंबर- 7: मेला अधिकारी- मणि प्रसाद मिश्रा
इनको रेलवे प्रशासन और मेला प्रशासन के बीच तालमेल बनाना चाहिए था, लेकिन ये नाकाम रहे। ये बस इस कोशिश में जुटे रहे कि मेला क्षेत्र में कोई हादसा ना हो, बाकी की जिम्मेदारी भगवान भरोसे थी।
आरोपी नंबर- 6: डीआरएम- हरेंद्र राव
रेलवे स्टेशन पर लोग जमा हुए तो उनके फौरी इंतजाम की जिम्मेदीर इन पर थी। लेकिन कुछ करने की बजाए ये हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
आरोपी नंबर- 5: जीएम एनसीआर- आलोक जौहरी
इलाहाबाद में चार करोड़ लोग आएंगे तो वापस कैसे जाएंगे। इस बारे में इनही को सोचना था, लेकिन इन्होंने पुख्ता इंतजाम नहीं किए।
आरोपी नंबर- 4: इलाहाबाद के कमिश्नर- देवेश चतुर्वेदी
बतौर कमिश्नर, चतुर्वेदी की जिम्मेदारी थी कि लोग आएं, स्नान करें और सुरक्षित वापस जाएं। ऐसे में 36 लोगों की मौत की सीधी जिम्मेदारी इनही पर बनती है। श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा मुहैया कराना तो दूर कमिश्नर साहेब पीड़ितों को परिजनों के बारे में सही जानकारी देने में भी नाकाम नजर आए।
आरोपी नंबर- 3: यूपी के चीफ सेक्रेटरी- जावेद उस्मानी
अगर रेलवे ने ट्रेनें कम मुहैया कराईं तो इनको ये बात याद आई हादसा होने के बाद, तभी तो हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की बजाए उस्मानी मीडिया को ये बताने में जुटे रहे कि राज्य सरकार ने ट्रेनें मांगी हैं और रेलवे मुहैया नहीं करा पा रहा।
आरोपी नंबर- 2: मेला मंत्री- आजम खान
आजम खान के कुंभ दौरे के दौरान भी लोगों ने उन्हें खामियों के बारे में बताया था। सरकार को ये जानकारी थी कि मौनी अमावस्या पर तीन से पांच करोड़ लोग जुटेंगे। फिर भी ये महाशय चुपपाच तमाशा देखते रहे। हद तो तब हो गयी जब हादसे के बाद इन्होंने बेहद शांत भाव से बताया कि कोई बड़ा वाकया नहीं हुआ है। हादसे के अगले दिन यानी कि सोमवार को ये दोपहर 12 बजे तक घर से नहीं निकले। इनके गार्डस ने बताया कि मंत्री जी सो रहे हैं। हैरानी की बात है कि 36 बेगुनाहों की मौत का दूसरा सबसे बड़ा जिम्मेदार होने के बावजूद मंत्री जी को इतनी गहरी नींद भला कैसे आई। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए मेला प्रभारी के पद से इस्तीफा दे दिया।
आरोपी नंबर-1 : यूपी सरकार के मुखिया- अखिलेश यादव
हादसे के वक्त समूची सरकार और खुद मुख्यमंत्री सैफई में बैठकर शादी का जश्न मनाते रहे, उनके साथ उनके अफसरों की फौज भी थी। सोमवार को यहां करीब दो दर्जन मंत्रियों को भी हाजिरी लगाने पहुंचना था। जाहिर है यहां साफ तौर पर संवेदनहीनता नजर आई। इलाहाबाद में जहां मातम पसरा रहा वहीं सूबे के मुख्यमंत्री सोमवार को भी शादी के जश्न में डूबे नजर आए। पूरा सरकारी अमला इस कोशिश में जुटा रहा कि सैफई में इंतजाम में गड़बड़ी ना हों।
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20 जून 2013
Feb 19, 2013
आप की बल्कू आप श्हाई बोलते हो की एन लोगु को इन इंशाप दिला पाएगए ए लोग
A .S DELHI
Feb 17, 2013
इन दस ज़िम्मेदार लोगों के अलावा रैलमंत्री और गृहमंत्री भी इस सबके लिए पूरे तरीके से ज़िम्मेदार हैं. अखिलेश और मायावती दोनों ने उत्तर प्रदेश को बर्बादी के कगार पर पहुँचा दिया है ये दोनो खुद के विकास और जातिवाद के सिवाय और कुछ नही करते.
TARUN MATHURA, UP
Feb 15, 2013
आपके कुल आकलन मे आपने अव्यवस्था फैलाने वाले राजनीतिक तत्वो को नज़रअंदाज कर दिया, आधे से ज़्यादा मेला परिसर मे राजनीति युक्त अखाड़े चलाए जाए रहे थे, और उत्तेजना फैलाने वाले हरसंभव प्रयास भी किए जा रहे थे. जिन स्वयसेवको पे मेला प्रबंधन का कार्य था वो भी परचम लहराने मे व्यस्त थेमेले की शुरुआत से घटना तक पुलिस तक चुकी थी, इन सब रोज रोज के राजनीतिक नौटंकी से
sharma kolkata
Feb 14, 2013
बिलकुलठीक कह रहे है आप यह लोग तो ज़िम्मेदार हैं ही लेकिन आपने रेल मंत्री और उनकी टीम को कैसे छोड दिया जिन्होने ना स्पेशल गाडिया चलवाईठीक से और ना स्टेशन पर लोगो को संभाल सके.
Rajesh Singh Allahabad
Feb 14, 2013
निस्पक्छ पत्रकारिता के लिए बधाई आम लोगो का भरोसा प्रशशण के संवेदनहीनता के चलते कम होता जा रहा है कोई भी इन दस मे से अपने कर्तव्यो का सही ढंग से निर्वहन करता तो शायद ये घटना नही घटित होती मेरा निजी मानना है की यदि जब भी भगदड़ मचे तो स्पीकर होने की दश मे पहले तो ये उद्घोषणा होनी चाहिए की सभी लोग जहा खड़े है वो वही खड़े रहे और फिर एक एक कर चले लेकिन पर्याप्त संख्या मे जवानो की ड्यूटी भी लगानी छाईए.
akash maheshwari durg
Feb 13, 2013
जब से उत्तरप्रदेश मे अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने है तब से लेकर आज तक मैने वाहा कुछ अच्छा होते नही सुनाअखिलेश यादव मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य है.....जो अपनी ज़िम्मेदारी नही निभा सक्ते.उन्हे बड़े पद मे नही रहना चाहिए.
amit tiwari jabalpur
Feb 13, 2013
बढ़िया रिपोर्टिंग के लिए धन्यवाद. सवाल यह है की क्या हमारा सिस्टम दोषियों का दोष सिद्ध कर उन्हें सज़ा दिला पाएगा जिससे मुटकों की आत्मा को शांति और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके.
satish rai ghazipur
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