22 मई 2012
जकिया को गुलबर्ग रिपोर्ट अभी न दी जाए: अदालत

15 फरवरी 2012
आईबीएन-7/सीएनएन-आईबीएन

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अहमदाबाद।
अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को आदेश दिया है कि वह 2002 के दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी में हुए नरसंहार की रिपोर्ट की प्रति जकिया जाफरी को अभी न सौंपे।

अदालत ने एसआईटी को आदेश दिया कि पहले वह 15 मार्च 2012 तक इस मामले से जुड़े तमाम दस्तावेज अदालत में पेश करे।

अदालत 29 फरवरी 2012 को फैसला करेगी कि जकिया जाफरी के वकील और दूसरे सामाजिक संगठन एसआईटी की रिपोर्ट देख सकते हैं या नहीं। अदालत ने कहा कि सभी शिकायतकर्ता जो एसआईटी की रिपोर्ट देखना चाहते हैं उनके मामले में सुनवाई रिपोर्ट पूरी तरह से अदालत में पेश किए जाने के बाद ही होगी।

इससे पहले अदालत से खबरें आई थीं कि अदालत ने एसआईटी को आदेश दिया है कि वह अपनी रिपोर्ट की प्रति जकिया जाफरी को दे, लेकिन दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता को न दे।

जकिया जाफरी पूर्व कांग्रेसी सांसद अहसान जाफरी की विधवा हैं। अहसान को इस नरसंहार में मार दिया गया था।

इससे पहले –

जकिया जाफरी पूर्व कांग्रेसी सांसद अहसान जाफरी की विधवा हैं। अहसान को इस नरसंहार में मार दिया गया था।

एक पंक्ति के आदेश में अदालत ने कहा कि पूरी रिपोर्ट शिकायतकर्ता जकिया जाफरी को दी जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यह रिपोर्ट उन्हें एक महीने के भीतर दी जाए।
अब एसआईटी रिपोर्ट सौंपे जाने की तारीख तय करेगी और रिपोर्ट जकिया को सौंप देगी।

दूसरी ओर अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और मुकुल सिन्हा को यह रिपोर्ट देने से मना कर दिया है।

इस बारे में कोर्ट ने फैसला 29 फरवरी तक के लिए टाल दिया है।

इससे पहले –

गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी दंगों पर तैयार हुई एसआईटी की रिपोर्ट की कॉपी दंगा पीड़ितों को मिलनी चाहिए या नहीं इस पर अहमदाबाद की मेट्रोपोलिटन अदालत आज फैसला सुनाएगी।

13 फरवरी को अदालत में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और मुकुल सिन्हा की इस याचिका पर सुनवाई हुई थी, जिसके बाद अदालत ने 15 फरवरी तक के लिए फैसला टाल दिया था।

गुलबर्ग: 15 फरवरी को फैसला, किसको मिलेगी रिपोर्ट


गौरतलब है कि इस मामले में एसाईटी का अदालत में कहना था कि रिपोर्ट की कॉपी सिर्फ जकिया जाफरी को दी जानी चाहिए। अन्य याचिकाकर्ताओं को नहीं।

एसआईटी के वकील एस. सी. जामुवार ने अदालत में कहा था कि रिपोर्ट तीस्ता के साथ जुड़े तमाम लोगों को न दी जाए। सिर्फ जाकिया जाफरी को ही रिपोर्ट दी जाए। इसके बाद यदि जकिया जाफरी किसी को रिपोर्ट देना चाहती हैं तो दे सकती हैं।

मालूम हो कि एसआईटी ने 8 फरवरी को मेट्रोपोलिटन अदालत में अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी।

गुलबर्ग सोसायटी: एसआईटी क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में पेश

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