14 फरवरी 2013
आईबीएन 7
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इलाहाबाद। इलाहाबाद में जारी महाकुंभ में कुछ संत परिवार नियोजन का विरोध कर रहे हैं। वो कुंभ में हिंदू धर्म खतरे में है का नारा लगा रहे हैं। संतों की राय है कि परिवार नियोजन हिंदुओं के लिए घातक है, लेकिन ऐसे संतों के खिलाफ अब महिला संगठनों ने ही मोर्चा खोल दिया है। इन संगठनों ने स्वामी के नाम खुलापत्र जारी किया है और परिवार नियोजन के विरोध को स्त्री की आजादी के खिलाफ षड़यंत्र बताया है।
महाराष्ट्र के स्वामी नरेंद्राचार्य की ओर से लगवाई गईं होर्डिंगों में दावा किया गया है कि देश में हिंदुओं की आबादी तेजी से घट रही है। स्वामी जी इसके लिए परिवार नियोजन को जिम्मेदार मानते हैं, जो उनके मुताबिक सिर्फ हिंदुओं पर थोपा जा रहा है। स्वामी नरेंद्राचार्य फिलहाल कुंभ क्षेत्र में नहीं हैं, लेकिन इस प्रचार अभियान को रामानंदी संप्रदाय के उनके गुरुभाई स्वामी हंसदेवाचार्य संभाले हुए हैं। उनका भी यही दावा है कि परिवार नियोजन हिंदुओं के लिए घातक है।
स्वामी हंसदेवाचार्य के मुताबिक एक देश के अंदर एक संविधान, किसी के लिए पांच शादी की छूट, कहीं एक भी नहीं। परिवार नियोजन सब पर लागू करो, किसी एक कौम पर नहीं। लेकिन इलाहाबाद के तमाम महिला संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता इस प्रचार को झूठ का पुलिंदा बता रहे हैं। स्त्री मु्क्ति संगठन की ओर से स्वामी नरेंद्राचार्य के नाम एक खुला पत्र जारी किया गया है। इसमें जनगणना के आंकड़ों के आधार पर दावा किया गया है कि हिंदुओं की आबादी घट नहीं रही है। मुक्ति संगठन की संयोजक डॉ. निधि मिश्र का साफ कहना है कि परिवार नियोजन से स्त्रियों की शारीरिक और सामाजिक हालत बेहतर हुई है।
महिला संगठनों का ये भी आरोप है कि ऐसे प्रचार से उनका जीवन और मुश्किल हो जाएगा। समाजिक कार्यकर्ता पद्मा सिंह के मुताबिक क्या बच्चा पैदा करने की मशीन है। औरत कब और किसका बच्चा पैदा करेगी, हिंदू, मुसलमान या इंसान पैदा करेगी, ये औरत का हक है। धर्म कोई भी हो, जब नवयुग की राह रोकता है तो अधर्म कहलाता है। आप ही तय करें कि स्त्री को खुला आकाश देने वाले परिवार नियोजन का विरोध करना धर्म है या अधर्म।
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पाठकों की राय
20 जून 2013
Apr 12, 2013
जीतने भी क़ानून है हिंदुव के लए है |दूसरे धर्मो के लए कोई क़ानून नही है|हमे तो राजीव गाँधी पर भी संदेह है |उनके पिता का नाम किया है उससे पता चल जाएगा ?राहुल गाँधी पर भी संदेह है किओ के वो भी अभी शादी नही की |उसे भी हिंदू नही कहा जा सकता | जो हिंदू है ही नही वो हिंदुव का किया सोचेगा|
kuldip kumar Ludhiana
Feb 20, 2013
बेवकूफ़ सोनिया के चम्चे मुसलमान अजगर है ..ऐसे ही देते रहोगे तो पूरा देश को निगल जाएगा,कुछ बचाओ हिंदू सिख और बौध के लिए ,मुसलमान को दोगे तो पाकिस्तान एक्सपोर्ट करेंग सोनिया की चापलूसी छोड़ो और देश भक्त बनो
shyam sydney
Feb 20, 2013
देश मैं सभी धर्मों के लिए क़ानून ऐक होना चाहिए नही मानने वालो के लिए सरकारी सुविधाओं मैं कटौती होनी चाहिए
jagdev singh khairthal alwar (now in democretic republic of congo)
Feb 19, 2013
दोस्तो क्या हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई पारसी सब इंसान नही तो फिर क्यों आपस मे विरोध पैदा कर रहे हो जब की दुनिया जानती है बुरे लोगो की कोई जाती धर्म नही होते भाई इंसान ने ही ये जाती-पाती धर्म वर्णव्यवस्था बनाए है. हम लोग को इनके चक्कर मे नही आना चाहिए! ये ब्रह्मा विष्णु महेश गणेश दुर्गा अल्लाह पेरमेश्वर इशौ मशी इनके चक्कर मे मत आओ इनके तो कुच्छ होना जाना कुच्छ नही हम आम आदमी अपनी कीमती जान इसके चक्कर मे गवा देते है. अब आप लोग बोलॉगे की ये तो नास्तिक है तो क्या हुआ कम से कम इसके कारण हम फालतू मे जान जोखिम तो नही डालते भगवान अल्लाह आदि के चक्कर मे आज तक करोड़ो लोगो के जान गयी है कुच्छ हासिल नही आने वाला ये साधु लोग सादी-व्यवहाह तो करना नही और हमारे बहू बेटी बहन पेर नज़र ज़रूर रखते है. आप लोग समझदार है इनके बातो पे ध्यान न दे वही बेहतर है.
VINOD KUMAR BAGHEL Mumbai
Feb 19, 2013
परिवार नियोजन देश की ज़रूरत हे ओर सभी धर्मो पर इसे शक्ति से लागू करना चाहिए, जिन्हे इससे परेशानी हे उन्हे पाकिस्तान चले जाना चाहिए, वहाँ बच्चे पैदा करने पर कोई रोक नही हे , लेकिन जब तक कॉंग्रेस इस देश मैं हे तब तक यह संभव नही हे
rakesh chandigarh
Feb 18, 2013
हम हिंदू भाईयोको सोचना होगा की हम अपने बच्चोको कैसा इंडिया देंगे अगर हमने आज नही सोचा तो कल हर आतंकबदी की मौत का बदला हमारे निर्दोष बच्चो से लिया जाएगा ये कड़वा सच है ना हमे इतिहास माफ़ करेगा ना हमारे बच्चे कल का सोचो और अपने आप से वादा करो की हम ऐसा कभी नही होने देंगे
vivek kashyap Mumbai
Feb 18, 2013
पहले अपनी सोच को धर्म से उपर करो. इंसानियत से जियो. हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी को पैदा करने वाला उपर वाला इनमें कोई भेद नहीं करता तो हम इंसानों की औकात क्या है. हमें अपने देश की एकता को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए ना की बेतुके बात बोलकर शत्रुता को बढ़ाना चाहिए. एक बार अंग्रेज़ो ने ये काम करके देश को तोड़ा है और अब ये धर्मगुरू और नेता यही काम कर रहे हैं और अफ़सोस हम उनकी बुरी नियत को समझ नही पा रहे हैं.
Rahul Sharma New Delhi
Feb 18, 2013
देश मे कोई भी क़ानून सभी धर्मो के के लिए समान रूप से लागू होना चाईए.
shivraj bhatia Lucknow
Feb 17, 2013
धर्म कोई भी हो उनको चाहिए की जिन बच्चो को ओ पल सकते है उन्ही पड़ा करे और पढ़ा लिखा कर अच्छा नागरिक बननाया जाए . परंतु इस समय भारत जैसे देश मे केवल मुस्लिम आबादी तेज़ी से भाग रही है जी कारण उ.प. मे राजनित होने लगी है मुस्लिम पूरे प्रदेश की भाग्या बिधता बनता जा रहा है तो असे मे हिंदू को आपनी रककचा के लिए ज्यदा बच्चे पैदा करना ही पढ़ेगा नही तो आपने ही देश मे गुलाम हो जाएगे.
om shukla lucknow
Feb 16, 2013
निधि सिंग आदि समाजिक कार्यकर्ता सरकार के डोनेषन पर पालने वेल जीव है
karani Dan Jain RAIPUR
Feb 16, 2013
संत जी बोले जनसांखेया बदाओ ंगार ये ग़लत है मत बदाओ एसलिए की जनसख्या तो बड़े गी ंगार ज़मीन नही बाडेगा जनसख्या बढ़ने का मन्त है लेकिन ज़मीन बढ़ने का मंत्र नही हैएसलिए प्रिवार निओजन ज़रूरी है
kamlesh dube bhatpar rani
Feb 15, 2013
दूसरे धर्म की नकल ही कर लो.|मुसलमानो ने कभी परिवार नियोजन नही अपनाया. ईसईओं ने कभी परिवार नियोजन नही अपनाया. सीखो ने कभी परिवार निओजन नही अपनाया | हिंदुव किओ अपना रहे है |कभी किसी राजनीताक पार्टी ने हिंदुओं को वोटो के लए लुभाया है?किओ इनमे ना तो एकता है और ना ही सरकार की तरफ़ से इन्हे कोई उत्साहित किया जाता है .
kuldip kumar Ludhiana
Feb 15, 2013
सही बात है क़ानून सबके लिए एक ही होना चाहिए , राजू कुमार गुप्ता सिवान बिहार
raju new delhi
Feb 15, 2013
संतों के बचन बिल्कुल सत्य हैं. हिंदू समाज को छ्होटा परिवार खुशियाँ अपार की सोच को त्यागना होगा नहीं तो सुअर से घृणा करने वाले सुअर जितना बच्चे पैदा कर हिंदू समाज को अपना गुलाम बना लेगें. धंधेबाज पदमा और निधि को कम बच्चे पैदा करने के फ़ायदे मुसलमानो को बताना चाहिए.
satish rai ghazipur
Feb 14, 2013
एक देश एक क़ानून हो, ओ धर्म उसको अलग क़ानून और हिंदू धर्म उसको अलग क़ानून, ए बहुत ना इंसाफी हे, पहेले इसके खिलाप कुछ करो
shyam nashik
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