इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
बृज खंडेलवाल
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आगरा। महात्मा गांधी की हत्या से किसे लाभ मिला? क्या होता यदि वह 10 साल और जिंदा रह जाते?
ये वे सवाल हैं, जिन पर ताज शहर में गांधीवादियों ने सोमवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर चर्चा की। बहुत से गांधीवादियों ने इसे बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद गांधीजी की मौजूदगी भारतीय राजनीति तथा सरकार के प्रति अलग रुख पेश करती।
गांधी को नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को गोली मार दी थी।
गांधीजी के हत्यारे को पकड़वाले का परिवार तंगहाल
गांधीवादी व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश चंद्र गुप्ता (86) ने ‘आईएएनएस’ से कहा, "यदि गांधीजी अगले 10 साल या इससे अधिक समय के लिए जिंदा रह जाते तो हालात अलग होते। महात्मा गांधी का हत्यारा निश्चित रूप से अपने मिशन व उद्देश्यों में विफल रहा। हत्यारे को कलंकित छवि के अतिरिक्त और क्या मिला, जिससे वह आज तक उबर नहीं पाया?"
दक्षिण-पूर्वी एशिया के विशेषज्ञ एवं टीकाकार पारस नाथ चौधरी ने आईएएनएस से कहा, "यदि गांधी दो वर्ष भी और जी जाते तो कांग्रेस पर या तो प्रतिबंध लगा दिया जाता या इसके मौलिक स्वरूप की पुनर्रचना होती।"
इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन (इप्टा) के महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने आईएएनएस से कहा, "यदि गांधी कुछ और समय के लिए जिंदा रहते तो विभाजन का दर्द कुछ कम हो सकता था, सत्ता के दलालों में भी नैतिकता बची रहती और भ्रष्ट राजनेताओं पर अंकुश लगता।"
उन्होंने कहा, "नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका को एकजुट रखा और नस्लीय आधार पर विभाजन नहीं होने दिया। महात्मा गांधी भी द्वि-राष्ट्र के सिद्धांत के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने में सक्षम होते।"
वहीं, ब्रज प्रांत राष्ट्रीय स्वयंसेव संघ के सदस्य अशोक कुलश्रेष्ठ ने कहा, "गांधीजी की हत्या से किसी को कोई लाभ नहीं मिला। यदि वह कुछ दिन तक और जिंदा रह जाते तो राजनीति का शुद्धिकरण हो गया होता। गांधीजी ने हमेशा प्रयोग किया और अपनी गलतियों से सीखा तथा उसमें सुधार किया।"
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पाठकों की राय
22 मई 2012
Feb 10, 2012
गाँधी जी अगर आज होते तो ससाद मे वो हे डर्टी पिक्चर देख रहे हे ते
Kamal Singh Rana Gurgaon
Feb 09, 2012
हम सभी मूर्ख है, राजकुमार वीरानी ने लगे रहो मुन्नाभाई बनाई, सबने गाँधी को याद किया, और पिक्चर हिट हूई
लेकिन केतन मेहता ने सरदार पटेल के लिए "सरदार' पिक्चर बनाई, किसीने चर्चा नही की, परेश रावल का रोल भी जोरदार था.....
अगर किसी ने नही देखी तो, एक बार देख ले ......मोहनदास और आशिक़ मिज़ाज़ जवाहर की पोल खुल जाएगी
Krupesh Patel Toronto
Feb 09, 2012
सभी पाठकों की राय पढ़ने के बाद पता चलता है की मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी है,में भी सभी पाठकों की राय से सहमत हूँ,इसी कमीणे की वजह से भारत ३० साल बाद आज़ाद हुआ ,सरदार भगत सिंह का हत्यारा ये गाँधी ही था.क्या इतिहास के किसी विद्यार्थी ने कभी पढ़ा की महात्मा गाँधी को लाठी की चोट के कारण अस्पताल मे भरती कराया गया,जबकि लाला लाजपत राय जी को लाठियों से पीट पीट कर मार दिया गया.अछा हुआ सेयेल को मार दिया न्हीं तो देश आज २० साल पीछे होता.
yogender kaswan sirsa,haryana
Feb 09, 2012
ये दुनिया का सबसे मूर्ख गुजराती था.......लानत है सरदार, मोदी, तोगड़िया.....गुजरात की शान है.....काल्पेश भाई शाह, वडोदरा
kalpesh vadodara
Feb 08, 2012
काश गाँधी जन्म ही नही लिया होता पूरा कुत्ता है काम किसी ने किया ओर नाम किसी का हुआ गाँधी ने तो इंडिया के लिए जान भी नही दिया उल्टा इंडिया को बेचने चला था इसको दो गज ज़मीन नही देना था साले कामीने को...इसको बहुत पहलेस्पर मार देना चाहिए था तो आज पाकिस्तान ओर इंडिया एक होता ना कसमीर के लिए लड़ते आपस मे भाईचारा होता कमीना गाँधी
Pinku USA
Feb 08, 2012
तब इस हिन्दुस्तान में और बीस पाकिस्तान बन गया होता
Ramakant Nalanda (Bihar)
Feb 06, 2012
गाँधी को १० साल पहले मार देना चाहिए था,अगर ये १० साल होर जिंदा रह जाता तो,और कई भगत सिंग फाँसी पे चॅड्वा दिए होते, ये भगत सिंग का कातिल है, ब्करी चौद. देश पे कलंक है
sukhibir badal badal
Feb 06, 2012
इस देश का सत्यानाश हो गया होता क्योंकि गाँधी जी को मुसलमान बहुत प्रिय थे क्योंकि जब
इस देश को बचाने वाले सरदार पटेल ही थे
manish indore
Feb 06, 2012
gandhi was rightly killed. he was responsible for killing of ten lac people. he was announcing that separate country will be on his dead body. hence people did not take timely safety measures and werekilled by other religion followers.the secondpoint is that he could have deployed the british armyto prevent genocide .the third point is that when separate country was carved out on population basis then why muslim were keptwhere as the muslims thrashed out almost all hindus
dharam singh bahadurgarh
Feb 05, 2012
गाँधी जिंदा होते तो बहुत बुरा होता
santosh mahoba
Feb 05, 2012
गाँधी 'दस ' साल ओर ज़िंदा रहता तो हमारा देश 'बीस' साल और गुलाम रहता, क्योकि उनका सिद्दन्त था की हिंसा मत करो ,शांति बनाए रखो |जबकि हमे आज़ादी क्रांति से ही मिली थी.
shashi meena alwar
Feb 04, 2012
अगर गाँधी को १० साल पहले मार दिया होता तो शायद देश का इतना बुरा हाल नही होता, नाथूराम ने बहुत देर कर दी कांग्रेश और गाँधी ने ही देश को बर्बाद कर दिया है .
विवेक पाठक
मुंबई
Vivek Pathak mumbai
Feb 02, 2012
गाँधी दस साल और जिंदा रहते तो शायद हमारा देश कही का नही रहता.
गाँधी अगर १० साल पहले मर जाते तो ज़्यादा अच्छा होता, कम से कम देश का बटवारा नही होता.
गाँधी को राष्ट्रपिता की जगह राष्ट्राशत्रु का खिताब देना चाहिए.
Saurabh Navi Mumbai
Feb 02, 2012
अगर गाँधी १० साल और जीते तो यह देश कांग्रेस का गुलाम होता और कितने भगत सिह रोज फाँसी पर चढ़ाए जाते और हमलोग उनका नाम शाहिद भगत सिंह २ , शाहिद भगत सिंह ३, शाहिद भगत सिंह ४.......करके शोक दिवस मानते और कहते हमारा देश महान है. अगर उतर प्रदेस मे कोई अपने आप को एक सच्चा भारतीय मानता है तो कांग्रेस को एक वोट ना दे.............
ANMOL BHUBANESWAR
Jan 31, 2012
कुमार भाई ने ठीक कहा, यदि गाँधी १० साल और जिंदा होते तो हाडराबाद / जूना गढ़ा भारत मे शामिल नही होते बल्कि भारत के बहुत सारे टुकड़े हो जाते और हिंदू अल्प संख्यक हो जाते/ इसलिए भगवान जो करता हे अच्छे के लिए ही करता हे. किसी ने ठीक कहा के भगवान के घर देर हे अंधेर नही.
sanjay singh bhopal
Jan 31, 2012
इस देश का सत्यानाश हो गया होता क्योंकि गाँधी जी को मुसलमान बहुत प्रिय थे क्योंकि जब
इस देश को बचाने वाले सरदार पटेल ही थे
Satish Rohtak
Jan 31, 2012
Hyderabad & Junagarh were merged with India by Sardar Patel, but Kashmir not...due to Nehru
If...If...Gandhi survive 10 years more, then he was also stop Sardar Patel to merge this two state.
K. Kumar Indore
Jan 30, 2012
मे गाँधी वादी नही हूँ पेर गाँधी समर्थक हू , वे ५ - ७ साल तक जीवित रहते तो इंडिया १५ - २५ साल आगे होता , मुझे आज के कोई भी गाँधी पसंद नही. मे बाबा रामदेव और नीतीश , एन. मोदी , माया जी , शाहनवाज़ हुसैन , आना , को बाल ठाकरे, ममता , को लीडर मानता हू .
राजू कुमार गुप्ता ( सिवान बिहार )
raju new delhi
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