15 फरवरी 2012
आईबीएन-7
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मुंबई। बृहन मुम्बई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में राज ठाकरे फैक्टर उथल-पुथल मचा सकता है। मुंबई के 37 फीसदी लोग मानते हैं कि वे शहर की सूरत बदलने की काबिलियत रखते हैं। वहीं 70 फीसदी ने यह भी कहा है कि वे अन्ना हजारे फैक्टर को ध्यान में रखकर वोट देंगे। यह नतीजा है नेटवर्क 18 के एक सर्वेक्षण का।
मुंबई में 16 फरवरी को मतदान होना है। माना जा रहा है कि अरसे से बीएमसी पर काबिज शिवसेना गठबंधन का कांग्रेस गठबंधन से इस बार कड़ा मुकाबला है। ऐसे में राज ठाकरे की शोहरत किस पर भारी पड़ती है, यह देखने वाली बात होगी।
दुनिया की सबसे अमीर कॉर्पोरेशन मुंबई महानगरपालिका में कुल 227 सीटें हैं, जिनके लिए कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना-भाजपा गठबंधन के बीच सीधी टक्कर है। इसे त्रिकोणीय बना रहे हैं मनसे नेता राज ठाकरे।
महाराष्ट्र: नगरनिगम चुनाव प्रचार खत्म, मतदान गुरुवार को
मुंबई के 55 फीसदी पुरुष और 45 फीसदी महिलाओं के बीच करवाए गए इस सर्वेक्षण में 18 से 35 साल के 40 फीसदी और 35 से 55 साल के 40 फीसदी लोगों से कुल 50 से भी ज्यादा सवाल पूछे गए। साथ ही इस सर्वेक्षण में 20 फीसदी ऐसे वरिष्ठ नागरिकों की राय को शामिल किया गया, जिनकी उम्र 55 साल से ज्यादा थी।
सवाल है कि 15 दिसंबर 2011 से 30 जनवरी 2012 के बीच हुआ यह सर्वेक्षण आखिर क्या कहता है। सर्वेक्षण के आंकड़े राज ठाकरे को इकलौता ऐसा बड़ा नेता करार देते हैं, जो मुंबई के हालात बदलने का माद्दा रखता है। 37 फीसदी लोगों ने राज ठाकरे को ऐसा नेता माना है।
शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे खासे पीछे हैं। सिर्फ 19 फीसदी लोग उन्हें हालात बदलने वाला नेता मानते हैं। वहीं 10 फीसदी लोग मौजूदा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को, 9 फीसदी शरद पवार के भतीजे अजित पवार को इस लायक मानते हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को सिर्फ 6 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बनाया है।
70 फीसदी ने माना कि अन्ना हजारे फैक्टर पर वोट पड़ेंगे, जबकि 30 फीसदी ऐसा नहीं मानते। 77 फीसदी लोग मानते हैं कि प्रतिनिधि के काम पर वोट देंगे। 32 फीसदी पैसे, 30 फीसदी धर्म और 15 फीसदी जाति के आधार पर वोट डालने की बात कबूलते हैं। मुंबईकर और बाहरी लोगों का मुद्दा भी चुनाव में उठा। 47 फीसदी ने माना कि अस्थायी परमिट के साथ बाहरी लोग मुंबई में रह सकते हैं, वहीं 19 फीसदी का मानना है कि बाहरी लोगों का मुद्दा राजनीतिक इस्तेमाल का मुद्दा भर है।
“शिवसेना ने बीएमसी को 40 हजार करोड़ का चूना लगाया”
15 फीसदी ने माना कि आधुनिक शहर में बाहरी लोगों की जरूरत है। सर्वेक्षण में यह सवाल भी उठा कि आखिर मुंबई की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार है। 72 फीसदी लोग भष्ट्र नगरसेवकों को जिम्मेदार मानते हैं। 49 फीसदी लोग शहर से जनता का जुड़ाव न होना इसकी वजह बताते हैं, जबकि 37 फीसदी का कहना है कि सिविक सेंस की कमी के कारण दिक्कतें हैं। 30 फीसदी का मानना है कि राज्य और केंद्र से बीएमसी को ठीक ढंग से आर्थिक मदद न मिलने से परेशानी है। 11 फीसदी ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि बाहरी लोगों के अतिक्रमण ने मुंबई को बदतर बना रखा है।
80 फीसदी लोगों का कहना है कि कचरा शहर की सबसे बड़ी समस्या है। खराब सड़क को 73 फीसदी लोग, ट्रैफिक जाम को 65 फीसदी, प्रॉपर्टी रेट को 56 फीसदी और अवैध निर्माण को 50 फीसदी लोग सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं।
सर्वेक्षण में राज, उद्धव और अजित पवार से जुड़े सवाल भी किए गए। 83 फीसदी लोग मानते हैं कि ये चुनाव राज, उद्धव और अजित पवार के लिए अहम की लड़ाई हैं। 74 फीसदी मानते हैं कि राज ठाकरे का एजेंडा मराठी लोगों के हित में है।
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मुंबई। बृहन मुम्बई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में राज ठाकरे फैक्टर उथल-पुथल मचा सकता है। मुंबई के 37 फीसदी लोग मानते हैं कि वे शहर की सूरत बदलने की काबिलियत रखते हैं। वहीं 70 फीसदी ने यह भी कहा है कि वे अन्ना हजारे फैक्टर को ध्यान में रखकर वोट देंगे। यह नतीजा है नेटवर्क 18 के एक सर्वेक्षण का।
मुंबई में 16 फरवरी को मतदान होना है। माना जा रहा है कि अरसे से बीएमसी पर काबिज शिवसेना गठबंधन का कांग्रेस गठबंधन से इस बार कड़ा मुकाबला है। ऐसे में राज ठाकरे की शोहरत किस पर भारी पड़ती है, यह देखने वाली बात होगी।
दुनिया की सबसे अमीर कॉर्पोरेशन मुंबई महानगरपालिका में कुल 227 सीटें हैं, जिनके लिए कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना-भाजपा गठबंधन के बीच सीधी टक्कर है। इसे त्रिकोणीय बना रहे हैं मनसे नेता राज ठाकरे।
महाराष्ट्र: नगरनिगम चुनाव प्रचार खत्म, मतदान गुरुवार को
मुंबई के 55 फीसदी पुरुष और 45 फीसदी महिलाओं के बीच करवाए गए इस सर्वेक्षण में 18 से 35 साल के 40 फीसदी और 35 से 55 साल के 40 फीसदी लोगों से कुल 50 से भी ज्यादा सवाल पूछे गए। साथ ही इस सर्वेक्षण में 20 फीसदी ऐसे वरिष्ठ नागरिकों की राय को शामिल किया गया, जिनकी उम्र 55 साल से ज्यादा थी।
सवाल है कि 15 दिसंबर 2011 से 30 जनवरी 2012 के बीच हुआ यह सर्वेक्षण आखिर क्या कहता है। सर्वेक्षण के आंकड़े राज ठाकरे को इकलौता ऐसा बड़ा नेता करार देते हैं, जो मुंबई के हालात बदलने का माद्दा रखता है। 37 फीसदी लोगों ने राज ठाकरे को ऐसा नेता माना है।
शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे खासे पीछे हैं। सिर्फ 19 फीसदी लोग उन्हें हालात बदलने वाला नेता मानते हैं। वहीं 10 फीसदी लोग मौजूदा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को, 9 फीसदी शरद पवार के भतीजे अजित पवार को इस लायक मानते हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को सिर्फ 6 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बनाया है।
70 फीसदी ने माना कि अन्ना हजारे फैक्टर पर वोट पड़ेंगे, जबकि 30 फीसदी ऐसा नहीं मानते। 77 फीसदी लोग मानते हैं कि प्रतिनिधि के काम पर वोट देंगे। 32 फीसदी पैसे, 30 फीसदी धर्म और 15 फीसदी जाति के आधार पर वोट डालने की बात कबूलते हैं। मुंबईकर और बाहरी लोगों का मुद्दा भी चुनाव में उठा। 47 फीसदी ने माना कि अस्थायी परमिट के साथ बाहरी लोग मुंबई में रह सकते हैं, वहीं 19 फीसदी का मानना है कि बाहरी लोगों का मुद्दा राजनीतिक इस्तेमाल का मुद्दा भर है।
“शिवसेना ने बीएमसी को 40 हजार करोड़ का चूना लगाया”
15 फीसदी ने माना कि आधुनिक शहर में बाहरी लोगों की जरूरत है। सर्वेक्षण में यह सवाल भी उठा कि आखिर मुंबई की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार है। 72 फीसदी लोग भष्ट्र नगरसेवकों को जिम्मेदार मानते हैं। 49 फीसदी लोग शहर से जनता का जुड़ाव न होना इसकी वजह बताते हैं, जबकि 37 फीसदी का कहना है कि सिविक सेंस की कमी के कारण दिक्कतें हैं। 30 फीसदी का मानना है कि राज्य और केंद्र से बीएमसी को ठीक ढंग से आर्थिक मदद न मिलने से परेशानी है। 11 फीसदी ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि बाहरी लोगों के अतिक्रमण ने मुंबई को बदतर बना रखा है।
80 फीसदी लोगों का कहना है कि कचरा शहर की सबसे बड़ी समस्या है। खराब सड़क को 73 फीसदी लोग, ट्रैफिक जाम को 65 फीसदी, प्रॉपर्टी रेट को 56 फीसदी और अवैध निर्माण को 50 फीसदी लोग सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं।
सर्वेक्षण में राज, उद्धव और अजित पवार से जुड़े सवाल भी किए गए। 83 फीसदी लोग मानते हैं कि ये चुनाव राज, उद्धव और अजित पवार के लिए अहम की लड़ाई हैं। 74 फीसदी मानते हैं कि राज ठाकरे का एजेंडा मराठी लोगों के हित में है।
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