03 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस/वार्ता
सिडनी। पृथ्वी से कोई 22 प्रकाश वर्ष की दूरी पर खोजे गए एक नए ग्रह पर पानी होने तथा जीवन की सम्भावना है। युनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में प्रोफेसर, क्रिस टिनी ने कहा है कि इस ग्रह पर पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की रोशनी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आता है। लेकिन यहां आने वाली अधिकांश रोशनी अवरक्त (इंफ्रारेड) है, इसलिए इसका अधिकांश हिस्सा ग्रह द्वारा सोख लिया जाएगा।
टिनी ने कहा, “इसका अर्थ यह होता है कि कुल मिलाकर यह ग्रह अपने तारे से लगभग उतनी ही मात्रा में ऊर्जा सोखता है, जितनी ऊर्जा सूर्य से पृथ्वी सोखती है। इसलिए यदि ग्रह की सतह चट्टानी है और वातावरण नम है तो यह स्थिति ग्रह पर तरल पानी होने के लिए उचित तापमान मुहैया कराता है।”
‘शुक्र’ पर जीवित प्राणी होने का दावा
पत्रिका ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित रपट में टिनी ने कहा है, "और तरल पानी को जीवन के विकास में जरूरी एक महत्वपूर्ण पूर्व शर्त के रूप में देखा गया है।" टिनी ने जेरेमी बैली के साथ मिलकर यह अध्ययन सम्पन्न किया है।
युनिवर्सिटी द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह ग्रह (जीजे 667सीसी) अपेक्षाकृत एक ठंढे तारे (जीजे667सी) का चक्कर लगाता है, और उसकी कक्षीय अवधि 28.15 दिनों की है तथा उसका न्यूनतम द्रव्यमान पृथ्वी से 4.5 गुना है।
टिनी ने बताया कि इसका मतलब यह है कि यह ग्रह अपने सूर्य से लगभग उतनी ही ऊर्जा ग्रहण करता है जितना पृथ्वी अपने सूर्य से करती है। इस कारण ग्रह का तापमान जीवन की संभावना के लिये एकदम उपयुक्त है। अगर इसकी सतह चट्टानी होगी और वातावरण में नमी होगी तो इस ग्रह पर जीवन की पूरी संभावना है।
नासा ने खोला राज, मंगल पर बहता है पानी!
जेरमी बेली और राब विअेनमेयर के साथ नये ग्रह को खोजने वाले टिनी ने कहा कि किसी ग्रह पर नमी का पाया जाना वहां जीवन की संभावना को प्रबल करता है। यह ग्रह अपने सूर्य की परिक्रमा 28.15 दिनों में पूरी कर लेता है और इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान से 4.5 गुना कम है।
खोजकर्ता दल के एक अन्य सदस्य ने बताया कि इस खोज ने हमारी सोच में काफी बदलाव ला दिया है हम जितना सोचते थे उससे कहीं अधिक भिन्न-भिन्न वातावरण में मानव बस्ती बनाने योग्य ग्रह पाये जा सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस/वार्ता
सिडनी। पृथ्वी से कोई 22 प्रकाश वर्ष की दूरी पर खोजे गए एक नए ग्रह पर पानी होने तथा जीवन की सम्भावना है। युनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में प्रोफेसर, क्रिस टिनी ने कहा है कि इस ग्रह पर पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की रोशनी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आता है। लेकिन यहां आने वाली अधिकांश रोशनी अवरक्त (इंफ्रारेड) है, इसलिए इसका अधिकांश हिस्सा ग्रह द्वारा सोख लिया जाएगा।
टिनी ने कहा, “इसका अर्थ यह होता है कि कुल मिलाकर यह ग्रह अपने तारे से लगभग उतनी ही मात्रा में ऊर्जा सोखता है, जितनी ऊर्जा सूर्य से पृथ्वी सोखती है। इसलिए यदि ग्रह की सतह चट्टानी है और वातावरण नम है तो यह स्थिति ग्रह पर तरल पानी होने के लिए उचित तापमान मुहैया कराता है।”
‘शुक्र’ पर जीवित प्राणी होने का दावा
पत्रिका ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित रपट में टिनी ने कहा है, "और तरल पानी को जीवन के विकास में जरूरी एक महत्वपूर्ण पूर्व शर्त के रूप में देखा गया है।" टिनी ने जेरेमी बैली के साथ मिलकर यह अध्ययन सम्पन्न किया है।
युनिवर्सिटी द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह ग्रह (जीजे 667सीसी) अपेक्षाकृत एक ठंढे तारे (जीजे667सी) का चक्कर लगाता है, और उसकी कक्षीय अवधि 28.15 दिनों की है तथा उसका न्यूनतम द्रव्यमान पृथ्वी से 4.5 गुना है।
टिनी ने बताया कि इसका मतलब यह है कि यह ग्रह अपने सूर्य से लगभग उतनी ही ऊर्जा ग्रहण करता है जितना पृथ्वी अपने सूर्य से करती है। इस कारण ग्रह का तापमान जीवन की संभावना के लिये एकदम उपयुक्त है। अगर इसकी सतह चट्टानी होगी और वातावरण में नमी होगी तो इस ग्रह पर जीवन की पूरी संभावना है।
नासा ने खोला राज, मंगल पर बहता है पानी!
जेरमी बेली और राब विअेनमेयर के साथ नये ग्रह को खोजने वाले टिनी ने कहा कि किसी ग्रह पर नमी का पाया जाना वहां जीवन की संभावना को प्रबल करता है। यह ग्रह अपने सूर्य की परिक्रमा 28.15 दिनों में पूरी कर लेता है और इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान से 4.5 गुना कम है।
खोजकर्ता दल के एक अन्य सदस्य ने बताया कि इस खोज ने हमारी सोच में काफी बदलाव ला दिया है हम जितना सोचते थे उससे कहीं अधिक भिन्न-भिन्न वातावरण में मानव बस्ती बनाने योग्य ग्रह पाये जा सकते हैं।
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21 मई 2012
Feb 04, 2012
ह्म तीन लोक के अंदर रहतेः हे आकाश पाताल ओर धरती तिनोलोकोको हम जान सकते हे कूद रत हमे बहुत देना चाहता हे धरती वासीयो को ईमान ओर धर्म नही भूलना चाहिए
Mohan lal medawat jain Banswara Rajasthan
Feb 04, 2012
वैगयानिकों की ऐसी बकवास र्रसेअर्च के बारे मे मैं पिच्छले २० सालों से सुनता पड़ता आ रहा हूँ. ये सब फालतू की बाते हैं. एक ग्रह प्रथवी को तो ठीक से संभाल नहीं सकते दूसरे ग्रहों की बाते करते हैं
aditya nigwekar pune
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