03 जुलाई 2009
वार्ता
नई दिल्ली। ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार ने अब अपनी नजरें 21 से 27 सितम्बर में डेनमार्क में होने वाली विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर टिका दी हैं।
पढ़ें- जर्मन ग्रां प्री में सुशील को स्वर्ण पदक
बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले सुशील ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि यह उनकी तीसरी विश्व चैंपियनशिप होगी और इस बार उनका इरादा इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने का है। सुशील इससे पूर्व पहली बार 2003 में अमेरिका में हुई विश्व चैंपियनशिप में उतरे थे और तब उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया था। इसके बाद 2007 में अजरबैजान में हुई विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने सातवां स्थान हासिल कर बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।
हाल में जर्मन ग्रां प्री में दुनिया के दिग्गज पहलवानों के बीच स्वर्ण पदक जीतकर अपना रूतबा कायम करने वाले सुशील विश्व चैंपियनशिप के लिए कड़ी तैयारियों में जुटे हुए हैं और वह सोनीपत में ताऊ देवीलाल स्पोटर्स काम्पलेक्स स्थित साई सेंटर में चल रहे शिविर में अपनी क्षमताओं को और धारदार बना रहें हैं। उन्होंने कहा, “ओलंपिक के बाद से बेशक मुझे कई समारोहों से गुजरना पड़ा, लेकिन मैंने अपने अभ्यास को कभी भी बाधित नहीं होने दिया और मैं लगातार अपना अभ्यास तेज कर रहा हूं। मेरी कोशिश है कि इस बार मैं विश्व चैंपियनशिप में कोई न कोई पदक जरूर हासिल करूं। हालांकि मेरा सीधा लक्ष्य स्वर्ण पदक है।”
पढ़ें- शाकाहार में है बहुत दम- सुशील
उल्लेखनीय है कि विश्व चैंपियनशिप में अभीतक किसी भारतीय पहलवान ने स्वर्ण पदक नहीं जीता है। सुशील के पास 2003 में पदक जीतने का बहुत अच्छा मौका था, लेकिन वह बेहद मामूली अंतर से पदक दौड़ से चूक गए थे। सुशील के गुरू महाबली सतपाल का कहना है कि सुशील 2003 में तो पदक नहीं जीत पाया था लेकिन इस बार उसके पदक जीतने की प्रबल संभावना है। सतपाल ने कहा, “हम सुशील को विश्व चैंपियनिशप के लिए हर तरह से तैयार कर रहें हैं और हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि वह पदक जीते।”
सुशील की जर्मन ग्रां प्री कुश्ती टूर्नामेंट की सफलता के बारे में सतपाल ने कहा कि यह एक बड़ा सशक्त टूर्नामेंट था जिसमें सभी देश अपनी ‘ए ग्रेड’ की टीमें भेजते हैं। ऐसे टूर्नामेंट में सुशील की स्वर्णिम कामयाबी इस बात का संकेत है कि वह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस टूर्नामेंट की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता को पराजय का सामना करना पड़ा।
पढ़ें- सुशील ने लौटाया कुश्ती का गौरव
इस टूर्नामेंट की अपनी कामयाबी के बारे में बताते हुए सुशील ने कहा, “स्वर्ण पदक तक पहुंचने के लिए मुझे चार बाधाओं को पार करना पड़ा। पहले मैंने बेल्जियम के पहलवान को चित किया, फिर जर्मनी के पहलवान को दो दौर में हराया, उसके बाद उजबेकिस्तान के पहलवान को चित कर फाइनल में जगह बनाई और स्वर्ण पदक के लिए बेलारूस के पहलवान को दो दौर में हराया।”
यह पूछने पर कि आगामी विश्व चैंपियनशिप में उन्हें किन देशों के पहलवानों से चुनौती मिलेगी इसपर सुशील ने कहा कि बेलारूस, क्यूबा, अमेरिका, जार्जिया, यूक्रेन, मंगोलिया, ईरान, जापान और कजाखस्तान के पहलवान काफी सशक्त हैं और वे उनके रास्ते में बाधा खड़ी कर सकते हैं। लेकिन उन्हें विश्वास है कि वह इन सभी बाधाओं को पार कर पदक जीतने में कामयाब होंगे।
पढ़ें- देश में कुश्ती का भविष्य सुनहरा- सुशील
सुशील के गुरू सतपाल ने कहा कि ओलंपिक कामयाबी के बाद उनके शिष्य के पास कई तरह के कार्यक्रमों जैसे नच बलिए और दस का दम में भाग लेने के आफर आए थे। इस बारे में उन्होंने सबसे पहले सुशील से पूछा था कि क्या वह इनमें भाग लेना चाहता है, लेकिन उसने साफ तौर पर इनमें भाग लेने से इनकार करते हुए कहा था कि उसका एकमात्र लक्ष्य कुश्ती में आगे बढ़ना है और देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
वार्ता
नई दिल्ली। ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार ने अब अपनी नजरें 21 से 27 सितम्बर में डेनमार्क में होने वाली विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर टिका दी हैं।
पढ़ें- जर्मन ग्रां प्री में सुशील को स्वर्ण पदक
बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले सुशील ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि यह उनकी तीसरी विश्व चैंपियनशिप होगी और इस बार उनका इरादा इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने का है। सुशील इससे पूर्व पहली बार 2003 में अमेरिका में हुई विश्व चैंपियनशिप में उतरे थे और तब उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया था। इसके बाद 2007 में अजरबैजान में हुई विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने सातवां स्थान हासिल कर बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।
हाल में जर्मन ग्रां प्री में दुनिया के दिग्गज पहलवानों के बीच स्वर्ण पदक जीतकर अपना रूतबा कायम करने वाले सुशील विश्व चैंपियनशिप के लिए कड़ी तैयारियों में जुटे हुए हैं और वह सोनीपत में ताऊ देवीलाल स्पोटर्स काम्पलेक्स स्थित साई सेंटर में चल रहे शिविर में अपनी क्षमताओं को और धारदार बना रहें हैं। उन्होंने कहा, “ओलंपिक के बाद से बेशक मुझे कई समारोहों से गुजरना पड़ा, लेकिन मैंने अपने अभ्यास को कभी भी बाधित नहीं होने दिया और मैं लगातार अपना अभ्यास तेज कर रहा हूं। मेरी कोशिश है कि इस बार मैं विश्व चैंपियनशिप में कोई न कोई पदक जरूर हासिल करूं। हालांकि मेरा सीधा लक्ष्य स्वर्ण पदक है।”
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उल्लेखनीय है कि विश्व चैंपियनशिप में अभीतक किसी भारतीय पहलवान ने स्वर्ण पदक नहीं जीता है। सुशील के पास 2003 में पदक जीतने का बहुत अच्छा मौका था, लेकिन वह बेहद मामूली अंतर से पदक दौड़ से चूक गए थे। सुशील के गुरू महाबली सतपाल का कहना है कि सुशील 2003 में तो पदक नहीं जीत पाया था लेकिन इस बार उसके पदक जीतने की प्रबल संभावना है। सतपाल ने कहा, “हम सुशील को विश्व चैंपियनिशप के लिए हर तरह से तैयार कर रहें हैं और हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि वह पदक जीते।”
सुशील की जर्मन ग्रां प्री कुश्ती टूर्नामेंट की सफलता के बारे में सतपाल ने कहा कि यह एक बड़ा सशक्त टूर्नामेंट था जिसमें सभी देश अपनी ‘ए ग्रेड’ की टीमें भेजते हैं। ऐसे टूर्नामेंट में सुशील की स्वर्णिम कामयाबी इस बात का संकेत है कि वह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस टूर्नामेंट की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता को पराजय का सामना करना पड़ा।
पढ़ें- सुशील ने लौटाया कुश्ती का गौरव
इस टूर्नामेंट की अपनी कामयाबी के बारे में बताते हुए सुशील ने कहा, “स्वर्ण पदक तक पहुंचने के लिए मुझे चार बाधाओं को पार करना पड़ा। पहले मैंने बेल्जियम के पहलवान को चित किया, फिर जर्मनी के पहलवान को दो दौर में हराया, उसके बाद उजबेकिस्तान के पहलवान को चित कर फाइनल में जगह बनाई और स्वर्ण पदक के लिए बेलारूस के पहलवान को दो दौर में हराया।”
यह पूछने पर कि आगामी विश्व चैंपियनशिप में उन्हें किन देशों के पहलवानों से चुनौती मिलेगी इसपर सुशील ने कहा कि बेलारूस, क्यूबा, अमेरिका, जार्जिया, यूक्रेन, मंगोलिया, ईरान, जापान और कजाखस्तान के पहलवान काफी सशक्त हैं और वे उनके रास्ते में बाधा खड़ी कर सकते हैं। लेकिन उन्हें विश्वास है कि वह इन सभी बाधाओं को पार कर पदक जीतने में कामयाब होंगे।
पढ़ें- देश में कुश्ती का भविष्य सुनहरा- सुशील
सुशील के गुरू सतपाल ने कहा कि ओलंपिक कामयाबी के बाद उनके शिष्य के पास कई तरह के कार्यक्रमों जैसे नच बलिए और दस का दम में भाग लेने के आफर आए थे। इस बारे में उन्होंने सबसे पहले सुशील से पूछा था कि क्या वह इनमें भाग लेना चाहता है, लेकिन उसने साफ तौर पर इनमें भाग लेने से इनकार करते हुए कहा था कि उसका एकमात्र लक्ष्य कुश्ती में आगे बढ़ना है और देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
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