30 मई 2008
वार्ता
नई दिल्ली। इरफान पठान ने कुछ साल पहले भारतीय टीम में अपनी प्रतिभा के झंड़े गाड़ दिए थे, लेकिन उनके बड़े भाई यूसुफ पठान को भारतीय टीम में आने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
यूसुफ के लिए आईपीएल एक ऐसा मंच साबित हुआ है, जहां उन्होंने अपनी क्रिकेट प्रतिभा का परिचय देते हुए न केवल चयनकर्ताओं को प्रभावित किया, बल्कि आगामी बांग्लादेश दौरे और एशिया कप के लिए भारतीय टीम में भी स्थान बना लिया।
25 वर्षीय यूसुफ ने आईपीएल में राजस्थान की तरफ से खेलते हुए अपनी धमाकेदार बल्लेबाजी और उपयोगी ऑफ ब्रेक गेंदबाजी से दिखाया कि वे अपने छोटे भाई इरफान से किसी भी नजरिए से कम नहीं हैं।
यूसुफ पठान से वॉर्न बेहद खुश
यूसुफ ने आईपीएल में अब तक 13 पारियों में तीन अर्द्धशतकों और 27.83 के औसत से 334 रन बनाए हैं। उन्होंने इसके अलावा टूर्नामेंट का सबसे तेज अर्द्धशतक भी बनाया है। उनके इसी प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें बांग्लादेश दौरे में अपना एकदिवसीय करियर शुरू करने का मौका दे दिया है।
यूसुफ ने 1999-2000 में बड़ौदा की अंडर-16 टीम से खेलते हुए विजय मर्चेंट ट्रॉफी में एक जोरदार बल्लेबाज और ऑफ स्पिनर के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद जल्द ही उन्हें बड़ौदा अंडर-19 और पश्चिम क्षेत्र की अंडर-19 टीम में ले लिया गया था।
उन्होंने अपना रणजी करियर 2001-02 में सौराष्ट्र के खिलाफ शुरू किया था। लेकिन उन्हें बड़ौदा की टीम का स्थाई सदस्य बनने के लिए 2004-05 सीजन तक इंतजार करना पड़ा।
यूसुफ पठान बने सर्वश्रेष्ठ घरेलू क्रिकेटर
इस बीच उनके छोटे भाई इरफान को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई। यूसुफ ने इस बात से हतोत्साहित हुए बिना अपना प्रदर्शन जारी रखा और पिछले तीन रणजी सीजन में हर बार 250 से ज्यादा रन बनाए और कम से कम 15 विकेट लिए। यूसुफ ने 31 प्रथम श्रेणी मैचों में 1502 रन बनाने के अलावा 84 विकेट भी हासिल किए हैं।
2006-07 सत्र में देवधर ट्रॉफी और घरेलू 20-20 टूर्नामेंट में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन से 20-20 विश्वकप के लिए उन्हें भारतीय टीम में जगह मिल गई। हालांकि इस टूर्नामेंट में उन्हें केवल फाइनल खेलने का मौका मिला।
लेकिन इसके बाद उन्हें एकदिवसीय मैचों के लिए नजरंदाज किया गया। मगर आईपीएल में उन्होंने अपनी आतिशी बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं को उनपर विचार करने के लिए मजबूर कर ही दिया।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एकदिवसीय मैचों में पठान बंधुओं की जुगलबंदी क्या रंग दिखाती है।
पठान भाईयों की रग रग में क्रिकेट
वार्ता
नई दिल्ली। इरफान पठान ने कुछ साल पहले भारतीय टीम में अपनी प्रतिभा के झंड़े गाड़ दिए थे, लेकिन उनके बड़े भाई यूसुफ पठान को भारतीय टीम में आने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
यूसुफ के लिए आईपीएल एक ऐसा मंच साबित हुआ है, जहां उन्होंने अपनी क्रिकेट प्रतिभा का परिचय देते हुए न केवल चयनकर्ताओं को प्रभावित किया, बल्कि आगामी बांग्लादेश दौरे और एशिया कप के लिए भारतीय टीम में भी स्थान बना लिया।
25 वर्षीय यूसुफ ने आईपीएल में राजस्थान की तरफ से खेलते हुए अपनी धमाकेदार बल्लेबाजी और उपयोगी ऑफ ब्रेक गेंदबाजी से दिखाया कि वे अपने छोटे भाई इरफान से किसी भी नजरिए से कम नहीं हैं।
यूसुफ पठान से वॉर्न बेहद खुश
यूसुफ ने आईपीएल में अब तक 13 पारियों में तीन अर्द्धशतकों और 27.83 के औसत से 334 रन बनाए हैं। उन्होंने इसके अलावा टूर्नामेंट का सबसे तेज अर्द्धशतक भी बनाया है। उनके इसी प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें बांग्लादेश दौरे में अपना एकदिवसीय करियर शुरू करने का मौका दे दिया है।
यूसुफ ने 1999-2000 में बड़ौदा की अंडर-16 टीम से खेलते हुए विजय मर्चेंट ट्रॉफी में एक जोरदार बल्लेबाज और ऑफ स्पिनर के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद जल्द ही उन्हें बड़ौदा अंडर-19 और पश्चिम क्षेत्र की अंडर-19 टीम में ले लिया गया था।
उन्होंने अपना रणजी करियर 2001-02 में सौराष्ट्र के खिलाफ शुरू किया था। लेकिन उन्हें बड़ौदा की टीम का स्थाई सदस्य बनने के लिए 2004-05 सीजन तक इंतजार करना पड़ा।
यूसुफ पठान बने सर्वश्रेष्ठ घरेलू क्रिकेटर
इस बीच उनके छोटे भाई इरफान को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई। यूसुफ ने इस बात से हतोत्साहित हुए बिना अपना प्रदर्शन जारी रखा और पिछले तीन रणजी सीजन में हर बार 250 से ज्यादा रन बनाए और कम से कम 15 विकेट लिए। यूसुफ ने 31 प्रथम श्रेणी मैचों में 1502 रन बनाने के अलावा 84 विकेट भी हासिल किए हैं।
2006-07 सत्र में देवधर ट्रॉफी और घरेलू 20-20 टूर्नामेंट में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन से 20-20 विश्वकप के लिए उन्हें भारतीय टीम में जगह मिल गई। हालांकि इस टूर्नामेंट में उन्हें केवल फाइनल खेलने का मौका मिला।
लेकिन इसके बाद उन्हें एकदिवसीय मैचों के लिए नजरंदाज किया गया। मगर आईपीएल में उन्होंने अपनी आतिशी बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं को उनपर विचार करने के लिए मजबूर कर ही दिया।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एकदिवसीय मैचों में पठान बंधुओं की जुगलबंदी क्या रंग दिखाती है।
पठान भाईयों की रग रग में क्रिकेट
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