13 जुलाई 2009
वार्ता
मिर्जापुर। संसद भवन समेत देश की कई धरोहरों के निर्माण में लगे पत्थरों की चर्चा भले नहीं हुई हो, लेकिन बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की स्वप्निल परियोजनाओं में लगाए जा रहे मिर्जापुर की खदानों से निकाले गए यही पत्थर, पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं।
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बसपा के जनक कांशीराम और भीमराव अंबेडकर के नाम पर उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा समेत कुछ स्थानों पर बनाए जा रहे पार्क और स्मारकों में मिर्जापुर के अहरौरा की खदानों से निकले पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन पत्थरों की गुणवत्ता का पता लोगों को तब चला जब पार्क और स्मारकों के निर्माण का मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा।
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लाखों वर्ष पूर्व शांत समुद्र की लहरों से निर्मित इमारती स्टोन ब्लॉक (सैंड स्टोन) विशेष रूप से यहीं पाए जाते हैं। हालांकि मिर्जापुर में पत्थरों की हजारों खदाने हैं लेकिन गुणवत्ता के मामले में इन पत्थरों का कोई सानी नहीं है।
मिर्जापुर के चुनार में पत्थरों के इन पहाड़ और खदानों का जिक्र हिन्दी के पहले जासूसी उपन्यास, देवकीनंदन खत्री लिखित ‘चन्द्रकांता संतति’ में भी किया गया है।
स्मारक और पार्क में हजारों टन पत्थरों के इस्तेमाल किए जाने के कारण स्थानीय खदान मालिकों की चांदी है। विशेष पत्थरों की यह खदानें अब उनके मालिकों के लिए सोने की खदान साबित हो रही है।
लगभग 60 खदानों एवं 12 आधुनिक मशीनरी प्लांटों से तराश कर पत्थरों को लखनऊ और अन्य जगहों पर पार्कों, भवनों एवं मूर्ति निर्माण के लिए भेजा जा रहा है। पिछले कई वर्षों से पत्थरों की मांग को देखते हुए खदानों की लीज एवं प्लांटों का फैलाव लगातार जारी है।
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खास बात यह है कि इन पत्थरों को बेरोकटोक और बेहिसाब भेजा जाना इसके मालिकों को काफी रास आ रहा है।
अहरौरा क्षेत्र में पत्थर की खदानें पहले भी थीं पर आज वाली बात पहले नहीं थी। पांच वर्ष पूर्व तक आधुनिक प्लांटों की कल्पना भी नहीं की जाती थी। आज करोडों की लागत वाले बड़े-बड़े संयंत्र रोज लग रहे हैं। ये संयंत्र राजस्थान के संगमरमर से भी ज्यादे चिकने पत्थर तैयार कर रहे हैं।
लखनऊ में पार्कों, स्मारकों, भवनों और मूर्तियों के निर्माण के लिए भेज जा रहे इन पत्थरों के विषय में जानकारी प्राप्त करना टेढ़ी खीर है।
न कोई अधिकारी और न कोई मालिक मुंह खोलने को तैयार है। मिर्जापुर के जिला खान अधिकारी एन.के.दास. यह एक बड़ा बवाल है, कहकर कुछ भी बताने से इन्कार कर देते हैं।
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दरअसल इस गोलमाल में हर कोई कुछ भी बताने से बच रहा है। असल में हर पांव घुटनों तक सना है।
सूत्रों के मुताबिक खदानों से 70 रुपए घनफीट का माल लखनऊ पहुंचते-पहुंचते 200 रुपए से भी ज्यादा मूल्य का हो जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक खदान मालिक ने बताया कि खदान पट्टाधारी पहले सीधे निर्माण निगम को सप्लाई करता था। अब प्रदेश के खान मंत्री बाबूराम कुशवाहा के हस्तक्षेप के बाद बिचौलिए अर्थात ठेकेदार को सप्लाई करता है।
पत्थरों को स्थानीय भाषा में कच्चा पत्थर एवं पक्का कहा जाता है। कच्चा पत्थर सीधे हाथियों एवं मूर्तियों के निर्माण के लिए राजस्थान जाता है। पत्थर बड़े विशाल होते हैं साथ ही इनमें स्क्रेच तक नहीं रहता है। इसे तराश कर फिर पक्का पत्थर लखनऊ भेजा जाता है। पक्का पत्थर वर्ग फुट या मीटर की दर से तथा कच्चा पत्थर घन फीट या घन मीटर से भेजा जाता है।
सूत्रों के अनुसार खदानों से 70 से 80 रुपए मूल्य का एक घनफीट पत्थर लखनऊ में 150 से 200 घनफीट के दर तक तथा पक्का पत्थर 45 से 50 रुपए वर्ग फीट पत्थर लखनऊ पहुंचते पहुंचते 100-150 तक मूल्य का हो जाता है।
मालिक इन पत्थरों को अपनी खदान पर ही बेचते हैं। अब तक कितने घनमीटर पत्थरों की सप्लाई की जा चुकी है यह पूछे जाने पर जिला खान अधिकारी नवीन कुमार दास कुछ भी बताने से इन्कार कर देते हैं। वे कहते हैं कि इन पत्थरों का हिसाब मेरे पास नहीं होता है।
इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि बोल्डर से लदे कई ट्रैक्टर जिले के कई थानों में सड़ रहे हैं। वहीं हजारों करोड़ रुपए के पत्थर बेरोकटोक, बेहिसाब जा रहे हैं। इसको कोई पूछने वाला नहीं है।
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14 फरवरी 2012
Dec 02, 2009
Yeh hatti ko अश्या लोकाइले म्हान्याले पाहिजे लो बेटा ये पाच अरब़ रुपये बी ठूसले .
alpha sarangkhed
Jul 15, 2009
Mere likhne se koi fark to mayavati par padne bala nhi he... Phir bhi..Yhi kahna chaahunga... Ke agar aese hi chalta rha to ek din gareeb k hath me roti nhi....Mayavati g ki murti hogi...Kya sarkar mayavati ka kuch nhi kar sakti ... ???
Kapil AGRA
Jul 14, 2009
जब नाम ही माया हो तो माया का मोह तो होगा ही भाई मूर्ति बनाने से अगर देश और लोगो की तरक़्क़ी होती है तो अटल.आडवाणी,मनमोहन.सोनिया की भी बनवा दो और हर चौराहे पे पूजा करो की इन्होने हमारे समाज को तरक़्क़ी पे लेकेर आए हैं.फिर बाद मैं इनको भगबान बना देना ..अरे अक़ल से पेदल लोगो अपने हाथ से बनाई मूर्ति की पूजा करोगे ? हाए अफ़सोस कुछ नाहो होना तुम लोगो का ..विनाश काले विपरीत बुद्धि.
arif farooqui dammam
Jul 14, 2009
ये घटिया लोग(मायावती) उत्तर प्रदेश व देश को बर्बाद कर रहे है/ यू पी के लोगो को अब समझ जाना चाहिए, ऐसे लोग सत्ता पर काबिज. होने के काबिल नही है/ गँवार और खूंसट औरत है ये बेहन कुमार मायावती--
Dharmendra Sagar Delhi
Jul 13, 2009
दलिटो के मसीहा, ग़रीबो के हमदर्द और बजुबानो के ज़ुबान देने वाले मान्यवर श्री कांशीराम साहब और वोट का अधिकार देकर सत्ता परिवर्तन की बुनियाद रखने वाले एवं भारत देश महान के सविधान निर्माता बाबासाहेब डाक्टर भीमराव अंबेडकर जी की समृीति के लिए जो किया जाए वो कम है. बहुजनसमाज पार्टी के अलावा और कौन से ऐसी पार्टी है जिसने कभी बाबासाहेब डाक्टर भीमराव अंबेडकर जी की मूर्ति लगानी पसंद करी है.
devinder New Delhi
Jul 13, 2009
एक कहावत है "अंधेर नगरी चौपट राजा "" आजकल ऐसा ही देखनेको मिल रहा है !
मायावती हो या और किसी की जनता को यह देखना है की, मूर्तिया बनने लायक वो है या
नही !जिसके उपर २३ क़ानूनी मामले प्रलंबित है ,जिसने मुख्यमंत्री बनने अलावा कोई एसा
काम नहीकिया है जिसे दुनिया या भारतीय लोग जानते हो ! अगर ऐसा ही रहेगा तो हर
राज्य मे मुख्य मंत्री और उसके चुनाव चिन्ह की मूर्ती बननी शुरू हो जाएगी ! और जनता का पैसापानी की तरह बहा जाए ! ये कहाँ का न्याय है ! मायावती हमेशा के लिए मुख्य मंत्री तो नही रहेगी !
mulani s a mumbai
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