05 सितंबर 2011
जोश 18
शकील अहमद
मुंबई। रामलीला मैदान में योगगुरु बाबा रामदेव द्वारा कालेधन के खिलाफ शुरू हुआ आमरण अनशन जब केंद्र सरकार ने जोर-जबरदस्ती खत्म करवाया, तो बाबा रामदेव और कांग्रेस सरकार के बीच कड़वाहट कुछ इस कद्र बड़ी की दोनों खुलेआम एक-दूसरे की निंदा करने लगे और आरोप-प्रत्यारोप का एक लंबा दौर शुरू हो गया और फिर उसके बाद शुरू हुआ सरकार की बदला लेने की कार्रवाई का दौर।
उसे बदला लेने की कार्रवाई इसलिए कह सकते हैं कि इससे पहले सरकार ने बाबा रामदेव को मनाने के लिए खूब जतन किए और तरह-तरह से समझाया, लेकिन जब बाबा टस से मस नहीं हुए, तो उसने जबरदस्ती का रास्ता अपनाया और उनका अनशन तुड़वाकर दम लिया।
और फिर शुरू हुआ बाबा रामदेव, उनकी कम्पनियों और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ सरकारी एजेंसियों द्वारा जांच-पड़ताल का लम्बा सिलसिला! आखिर सरकार ने यह काम इससे पहले क्यों नहीं किया था, क्यों सरकार ने यह पता नहीं करवाया था कि बाबा रामदेव की कम्पियां फर्जी हैं या बालकृष्ण विदेशी हैं?
यानी सरकार और बाबा रामदेव के बीच अनबन जब सरे-आम हुई तो सरकार ने भी कमर कस ली उन्हें सबक सिखाने के लिए।
बाबा रामदेव से पहले इस तरह की कार्रवाई पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण के खिलाफ भी की गई थी, हालांकि इसके पीछे सरकार प्रत्यक्ष रूप से नहीं थी, लेकिन माना जाता है कि अमर सिंह के मार्फत सरकार ने ही शांति भूषण-अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच हुई विवादापस्द बातचीत के कैसेट को सरेआम किया।
फिर बारी आई, आंध्र प्रदेश के पूर्व व दिवंगत मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के बेटे और कांग्रेस से बागी हुए नेता जगनमोहन रेड्डी की, जिन्हें कांग्रेस से अलग होकर एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का खामियाजा भुगतना पड़ा। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले दिनों सीबीआई को आदेश दिया कि वह जगनमोहन की अकूत संपत्ति की जांच करे। इस पर जगनमोहन ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस छोड़ने के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
उसके बाद बारी आई किरण बेदी, ओम पुरी, प्रशांत भूषण और फिर अरविंद केजरीवाल की। हालांकि इस बीच कांग्रेस के कई नेता अन्ना हजारे के खिलाफ भी जहर उगलते रहे और और उनके खिलाफ कई आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमे भी दर्ज करते रहे।
किरण बेदी को रामलीला मैदान में सरकार को मुखौटाधारी कहने और ओम पुरी को सांसदों को अनपढ़, गंवार और नालायक कहने के एवज में विशेषाधिकार हनन के नोटिसों का सामना करना पड़ रहा है।
अब सरकार ने अन्ना के आंदोलन के कर्ताधर्ता और समाजसेवी अरविंद केजरीवाल को भी निशाना बना लिया है। एक ओर तो उन पर आरोप है कि उन्होंने आयकर विभाग में सरकारी नौकरी पर रहते हुए नौ लाख रुपए बकाया रखा है, जिसे उन्हें चुकाना होगा।
अन्ना इसे उनके साथियों के खिलाफ हो रही सरकारी साजिश मानते हैं, हालांकि केजरीवाल कहते हैं कि चूंकि मैं जनहित का काम कर रहा हूं, इसलिए मेरा यह बकाया माफ कर दिया जाना चाहिए।
आयकर विभाग ने अन्ना के एक अन्य साथी कुमार विश्वास को भी नोटिस भेजा है।
इस तरह यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सरकार उन लोगों पर खुलेआम कार्रवाई कर रही है, जो उसके खिलाफ कोई मंच खोल रहे हैं या उसके खिलाफ कुछ बोल रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस सरकार उसके खिलाफ बोलनेवाले किसी भी व्यक्ति के साथ वैसा ही व्यवहार करेगी, जैसा वह बाबा रामदेव के साथ कर चुकी है?
क्या सरकार अपनी बात न माननेवालों को पुराने मामलों में जवाबतलब करेगी या क्या वह उनके खिलाफ नोटिसें भेजकर उन्हें परेशान करेगी?
अगर ये सभी पहले से ही दोषी हैं, तो सरकार अब तक चुप क्यों बैठी थी?
क्या सरकार अब उनके खिलाफ इसलिए कार्रवाई कर रही है कि वे सरकार के खिलाफ उठकर खड़े हुए हैं?
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21 मई 2012
Sep 09, 2011
घोटाले करने वालों की सरकार है | इनसे पोलीस भी तँघ है |जब किसी आरोपी को पकड़ा जाता है तो इन्ही के नेता का अपराधी को षोडने का फ़ोनर आ ज़ाटा है | या फिर नौकरी करनी है के नहिया बदली का ड्ऱा कर दिया ज़ाटा है|आंतकवाद इन्ही की किरपा से हो रहा है |दोषिो के बारे म पी चिन्डरम जी किया कहते है के अगर दोषिो को सजा दी घाई तो हालात कराब हो जाएंगे |अगर कोइ पोलीस अदालत भेजने की ब्ज़ाएेदोषी का क़ाम त्ममम करना चटा है के यह फ़र्जी इनकौंटेर है | किया इससे पोलीस का मनोबल बडेगे |किया यह पोलीस के अंडुरनी मामलो म
KULDIP KUMAR ludhiana
Sep 06, 2011
हाँ ये आपातकाल मे होने वाली करवाही हा , सांसद कहते हा टू अदा होती ही लोग क़हते हे तो ख़ाता होती हाए
amit raipur
Sep 06, 2011
बरबाडे कॉंग्रेस करने को सिरफ़फ़् एक ही उल्लू काफ़ी था आ हा सीट पे उल्लू बैठा है जाने कॉंग्रेस का की होगा
kirti Lucknow
Sep 06, 2011
कॉंग्रेस एक नंबर की लूची पार्टी है. उपर से लेकर नीचे तक सारे क सारे एक नंबर क दोगेले नेता है . सालो को गाली देने का मान कर रहा है. और ओम पूरी ने बिल्कुल ठीक कहा है इन कुत्टो क बारे मे. . .
sanjeev new delhi
Sep 05, 2011
विनाश काले विपरीत बुद्धि.....कांग्रेस पार्टी को बर्बाद करने के लिए कपिल सिब्बल, दिग्विजय सिंह, चिदंबरम और मनीष तिवारी काफी हैं, इन लोगो ने मनमोहन सिंह के करे हुए सारे अच्छे कार्यो पर पानी फेरने का काम किया है. इनको तुरंत पार्टी से निकाल देना चाहिए
raj delhi
Sep 05, 2011
कॉंग्रेस को आने वेल उ.प.चुनाव मे पता लग जाएगा, इनकी एकडी सब निकल जाएगी,आ तो एक हू बात याद आती हे वीनस काले बिपरीत बुद्धि.आ तो कॉंग्रेस को भगवान ही .
vinod bangalore
Sep 05, 2011
Jab se vote dalane laga hon. Kongress ki vote de hai. Lakin is waqt kongress badle ki karwahi kar rahi hai. Anna team ke sath jo ho raha hai vo galt hai. Sarkar bharst hai islea ye kar rahi hai.
ramesh sharma rohtak haryana
Sep 05, 2011
कांग्रेस विरोद की कारवाहेई करा रही है
ramesh rohtak haryana
Sep 05, 2011
भारतीय राजनीती का इतिहास बताता है ! की जिस भी पार्टी ने बदले की कार्यवाही की वो गर्त मैं चली गयी ! , वैसे भी कहावत है जो दूसरे के लिए खड्डा खोदता है! ऊपरवाला उसके लिए खाई तैयार रखता है !, धन्यवाद
NARENDER SINGH RAWAT JAIPUR
Sep 05, 2011
गले मा हड्डी अटक गई ह जिस से बोलेने म तकलीफ़ हो रही ह . तोड़ा बहुत तो उल्टा सीधा निकलेगा ही तो भयए ग़लत मत समझना
Narender Kumar Rohtak
Sep 05, 2011
कॉंग्रेस बिल्कु बदले करवाई का है खामियाजा उसे चुनाओ वा भुगतना परेगा
vivek lucknow
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