02 जुलाई 2009
वार्ता
नई दिल्ली। सिख विरोधी दंगों का रोष जाहिर करने के लिए आम चुनावों के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम पर जूता फेंकने वाले युवा सिख पत्रकार जरनैल सिंह को उनके अखबार समूह ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
जरनैल सिंह अखबार ‘दैनिक जागरण’ में संवाददाता थे और 7 मई की इस घटना के बाद उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था।
अखबार ने कांग्रेस मुख्यालय में भरे संवाददाता सम्मेलन में जूता फेंकने की करतूत को पत्रकारिता मानकों के विरूद्ध करार दिया है और इसे अपने संगठन के अनुशासन का घोर उल्लंघन बताया।
पत्रकार जरनैल सिंह से शिकायत नहीं: चिदंबरम
सिंह ने बताया, “चुनाव नतीजे आने और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुझे मेरे प्रबंधकों ने कार्यालय बुलाया था और मुझसे इस्तीफा देने को कहा था। लेकिन मैंने ऐसा करने से इंकार कर दिया था”।
गृहमंत्री पर जूता फेंकने की इस घटना के बाद आम चुनावों के आखिरी दौर में जूता फेंकने की घटनाओं की झड़ी लग गई थी और कुछ नेता तो मंच के सामने जाल लगाकर सभाएं करने लगे थे। और तो और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री तक की सभाओं में इस तरह घटनाएं होने लगी थीं।
इस घटना से स्तब्ध कांग्रेस ने भी अपनी चुनाव रणनीति में फेरबदल किया था और दिल्ली से अपने दो उम्मीदवारों सर्वश्री जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह को बदल दिया था।
केन्द्रीय गृहमंत्री चिदंबरम पर पत्रकार ने जूता फेंका
टाइटलर के स्थान पर जे.पी. अग्रवाल को और सज्जन सिंह के बजाए उनके भाई रमेश कुमार को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया जो चुनाव जीतने में कामयाब रहे।
अपनी बर्खास्तगी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि अखबार के प्रबंधकों ने चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी के दबाव में यह कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि प्रबंधकों के इस कदम से उनका हौंसला टूटा नहीं है और सिखों के खिलाफ हुई नाइंसाफी से लड़ने की उनकी भीतरी ताकत और बढ़ी है।
जूता फेंकने वाले पत्रकार को चुनाव टिकट प्रस्ताव
अलबत्ता सिंह ने माना कि जूता फेंककर रोष जताने का उनका कदम सही नहीं था।
सिंह की ‘पत्र सूचना कार्यालय’ की मान्यता पहले ही समाप्त की जा चुकी है और जो जूता उछाला गया था, वह भी अभी पुलिस के कब्जे में है।
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14 फरवरी 2012
Jul 03, 2009
सिंग साहिब ने शू मार कर चिटंबरम का अपमान नही किया , बल्कि उनको थूकना था, क्योकि अगर किसी को न्याय नही मिलेगा तो क्या वो हार डालेगा , वो भी २५ साल बाद, अब हमे अपना लोगो बदल देना होगा, सत्या मेव जयते की जगे सत्या मे जयते कर देना होगा, अब हम देख रहे हॅ, कोर्ट देख रहा हॅ , अगले जनम मे न्याय मिलेगा
kaddu kumar delhi
Jul 02, 2009
उस समय चुनाव का दोर था जो की पी. चिदंबरम अपमान का घूट पी गये, वरना वो जर्नेल सिंघ को उसी समय जैल में डलवा देते, पत्रकार को माफ़ करने का तो एक ढकोसला था वो समय की प्रतीक्षा कर रहे थे, और अब वो समय आ चुका है, बदला लेने का
devraj meerut
Jul 02, 2009
The sikh gentelman has done a right job , these mintisters even do not desrves to welcome by shoe, they have to tks for this good gesture .10000 sikhs killed in 1984, and govt unable to caught even one guy.So there reply is that we r looking on it , also court looking on it,
singh delhi
Jul 02, 2009
जरनैल ने जो किया वो ड्यूटी पर किया इसलिए उनके अख़बार को पूरा ह्क है उनके हटाने का. पर इस वक़्त यह कार्रवाई कॉंग्रेस के बदला लेने की प्रा व्रती को भी दर्शाता है.
Bablu Shrivastava Indore
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