वार्ता
नयी दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ में नक्सलियों के हमले में 30 पुलिसकर्मियों की मौत को व्यथित कर देने वाली घटना बताते हुए दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई करने तथा पीडितों के परिजनों को उचित मुआवजा देने को कहा है।
| छत्तीसगढ़: नक्सली हमला, 25 जवान शहीद |
| छत्तीसगढ़ हमला: 13 पुलिसकर्मी लापता, हाई अलर्ट |
| छत्तीसगढ भारत का अंग है या नहीं? |
आयोग ने उम्मीद जतायी कि मारे गये पुलिसकर्मियों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा तथा गंभीर रूप से घायलों को उचित वित्तीय मदद दी जाएगी। आयोग ने कहा कि सभी देशवासियों को मारे गये पुलिसकर्मियों के परिजनों के प्रति संवेदना जतानी चाहिए।
आयोग ने इस घटना पर आज जारी बयान में राज्य में सुरक्षा की स्थिति बनाये रखने में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की भूमिका को स्वीकार करते हुए करते हुए कहा कि कल के हमले में मारे गये पुलिसकमियों की बडी संख्या को देखते हुए पीडितों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने के लिए तत्काल उचित कदम उठाने की जरूरत है।
आयोग ने कहा कि पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था लागू कर लोगों की जानमाल की रक्षा करने में अपने कर्तव्यवहन के दौरान कई बार खुद की और अपने परिजनों की जान जोखिम डालते हैं। आयोग ने उच्चतम न्यायालय में पहले दाखिल एक हलफनामे में पुलिसकर्मियों की कामकाज की दशा सुधारने और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने के लिए उचित उपाय करने की सिफारिश की है।
आयोग ने कहा है कि राज्य को नागरिकों के जानमाल और उनके मानवाधिकारों की रक्षा में लगे इन पुलिसकर्मियों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए ।
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14 फरवरी 2012
Jul 16, 2009
शहीदों को कोटि-कोटि नमन.
mukesh shrivastava ujjain
Jul 16, 2009
ये नकशालियो द्वारा किया गया निंदनीय कार्य है...सबसे बड़ी बात ये है की किसी केंद्रीय नेताओ की संवेदना हादसे के बाद आई ही नही तो हम आम जनता से क्या अपील करे .ये नेता भी जगह देखकर संवेदना व्यक्त करते है .इनको उन पोलिश वालो की बीवी बच्चो से कोई मतलब नही है. हाइ कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मंत्रियो को झूती सप्त खाने का क़ानूनी अपराध मानकर अपने पद से हट जाने के आदेश देने चाहिए...
SAARTHI SURAT
Jul 15, 2009
इस तरह के हमलो से बचने के लिए भारत को अपने क़ानून को बदलना होगा वरना जवान असे ही शाहिद होते रहेंगे ओर कुछ नही होगा अगर एक पूलिश वाला छ्होटी सी भी ग़लती कर देगा तो हज़ारो लोग अंगुली उठाएँगे जबकि आतंकवादियो के लिए हज़ारो ग़लती माफ़ है. एसा क्यो ? Jai haind
MOhan Prajapti Ahmedabad
Jul 14, 2009
देश को संवेदना व्यक्त स्वयमेव करनी चाहिए क्योकि इन पोलिश वालो ने जान अपने नागरिको के सुरक्षा के लिए दी है घने.जंगलो मे लड़ना आसान नही होता . सबसे बड़ी बात ये है की किसी केंद्रीय नेताओ की संवेदना हादसे के बाद आई ही नही तो हम आम जनता से क्या अपील करे .ये नेता भी जगह देखकर संवेदना व्यक्त करते है .इनको उन पोलिश वालो की बीवी बच्चो से कोई मतलब नही है.
yogendra chhuikhadan
Jul 14, 2009
एक मानव का क्या अधिकार है उसे तो एक मानब जानता तक नही / और उसके लिए बना आयोग की कोई सुनता भी नही / सिर्फ़ पेपर बाज़ी है / जनता की आँखो मे धूल झोकने जैसा/लोग मरे ये जीए नेता तो सुरक्चित है / पोलीस मरे या ज़बान या फिर जनता नेताओ को क्या फ़र्क पड़ने वाला ? सच मे दोषी हम है जो पाँच साल तक उनको गद्दिपार बैठा कर आस लगते हैकी मेरे लिए कुछ करेगे / गद्दी से उतारने के लिए माँग हानि चाहिए जो जनता के लिए न सोन्चे
A.K. Chandigarh
Jul 14, 2009
आज हमारे समाज मे सामाजिक मूल्यो का हरास हो रहा है, हमे लोगों को हमारे सामाजिक मूल्यो के महत्व को बताना होगा और उसे सही रास्ता दिखाकर भौतिक सुख के पीछे न भाग कर सामाजिक कर्तव्या का भी पालन करना होगा और उसके मन मे दूसरो के प्रति आदर का भाव भी भरना होगा.
Ravi Bhushan Delhi
Jul 14, 2009
लोगो की सवेदना अपने अपने कारणों से मर गई हे! सब्जी ठेले वाला रोज तय समय पर मेरे घर के पास इतनी ज़ोर से चिल्लाता हे, दिमाग़ फट जाता हे,,वो किसी कारण से मर जाए पिंड छूटे,,नई उमर का लड़का अकारण पीछे से प्रेशर हार्न बजता हे, पता नही क्यो, सवेदना लाए कहाँ से
sanjay nagia dhar m.p.
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