11 जुलाई 2009
वार्ता
वॉशिंगटन। पाकिस्तानी सेना ने तालिबान नेता मुल्ला मोहम्मद उमर और उसके अन्य कमांडरों के संपर्क में होने की घोषणा करते हुए कहा है कि तालिबानी कमांडरों को अमेरिका के साथ वार्ता की मेज पर लाया जा सकता है।
अमेरिकी टीवी चैनल ‘सीएनएन’ को कल दिए एक विशेष साक्षात्कार में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अथर अब्बास ने यह घोषणा की।
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उन्होंने कहा कि अमेरिका और तालिबान के बीच इस मध्यस्थता के बदले में पाकिस्तान अपने चिर प्रतिद्वंदी भारत के साथ उसकी सुरक्षा चिंताओं पर अमेरिका से आश्वासन चाहता है।
अब्बास की इस घोषणा के बाद ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका तालिबान के बड़े नेताओं और पाकिस्तान की भारत के साथ सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा करने का इच्छुक है।
अब्बास ने माना कि अफगानिस्तान में सोवियत संघ से संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना का अमेरिका के साथ-साथ तालिबान आतंकवादियों के साथ बड़ा गहरा संबंध था तथा अभी भी सेना का तालिबान के सबसे बड़े नेताओं मुल्ला उमर, जलालुद्दीन हक्कानी, मुल्ला नजीर तथा गुलबदिन हिकमतयार के साथ संपर्क है।
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उन्होंने कहा, “हां यह सही है कि सोवियत संघ के साथ संघर्ष में इंटर सर्विसेज एजेंसी (आईएसआई) सबसे आगे थी। अब इस प्रकार के संगठनों (तालिबान) के साथ संपर्क बनाए रखने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान सरकार की नीति उन्हें सहायता, वित्तीय मदद या प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है”।
मेजर जनरल अब्बास ने कहा कि अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद इस प्रकार के संगठनों को सहायता देने की पाकिस्तानी नीति में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। इस नीति का पाकिस्तान सरकार, सेना और आईएसआई ने पालन किया है।
हालांकि उन्होंने दावा किया कि दुनिया की कोई भी गुप्तचर एजेंसी अन्य संगठनों के लिए अपने अंतिम दरवाजे बंद नहीं करती इसलिए आईएसआई के तालिबान के साथ संपर्क अभी भी बने हुए हैं।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की सेना में तालिबान और अमेरिका के बीच संघर्ष विराम कराने और दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लाने की क्षमता है।
मेजर जनरल अब्बास ने जोर देकर कहा कि दोनों संघर्षरत पक्षों को वार्ता की मेज पर लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि तालिबान के ‘गॉडफादर’ माने जाने वाले आईएसआई के पूर्व प्रमुख हामिद गुल ने भी कहा कि तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत कराई जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि लेफ्टिनेंट जनरल गुल ने कहा है कि ओबामा प्रशासन पाकिस्तानी सेना की मदद से मुल्ला उमर तक पहुंच सकता है।
माना जा रहा है कि पाकिस्तान की इस ताजा घोषणा से ओबामा प्रशासन तालिबान आतंकवादियों के खिलाफ लंबे समय से चल रहे संघर्ष का कूटनीतिक हल निकालने में मदद मिलेगी।
ज्यादातर लोगों का मानना है कि तालिबान के साथ विवाद का अंतिम हल राजनीतिक और आर्थिक होगा। इसलिए पाकिस्तान का यह प्रस्ताव के बाद वर्ष 2001 से चले आ रहे इस संघर्ष के कूटनीतिक समाधान का पहला अवसर हो सकता है।
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13 फरवरी 2012
Jul 14, 2009
तालिबान का पाकिस्तान पेर हमला सिर्फ़ एक छलावा है, असल मे पाकिस्तान तालिबान को भारतीय सीमा रेखा के पास लाना चाहता है. सारी दुनिया का ध्यान पाकिस्तान तालिबान युध पर होगा और इसका फयडा उठा कर कई तालिबानी भारतीय सीमा को पार करने की कोशिश करेंगे. एक माँ अपने ही बेटे को कैसे मरेगी, तालिबान अमरीका और पाकिस्तान की नाजायज़ संतान है दोनो ने ही उसे पाल पॉस कर बड़ा किया है, आज जब वही तालिबान अमरीका के लिए ख़तरा बना तो वह उसे हटाना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान अब पूरी तरह तालिबान के कब्ज़े मे है.
madhur Bikaner
Jul 13, 2009
now they are coming to the point.
ajay chhindwara,MP
Jul 12, 2009
ये तो पहले से ही सब को पता है
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