02 जुलाई 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
लखनऊ। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को समलैंगिक संबंधों को वैध ठहराने के फैसले पर ऐतराज जताते हुए समलैंगिकता को भारतीय संस्कृति के खिलाफ करार दिया है।
सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंग महली ने गुरुवार को ‘आईएएनएस’ से कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा समलैंगिकता को कानूनी मान्यता देना अनुचित है। यह समाज के लिए बहुत घातक और नुकसानदेह है।
उन्होंने कहा, “कोई भी धर्म समलैंगिकता को स्वीकार नहीं करता। इसे मान्यता देने से पूरी युवा पीढ़ी गर्त में चली जाएगी”।
मर्जी से समलैंगिक संबंध जायज: दिल्ली हाईकोर्ट
उधर, शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद ने कहा, “समलैंगिकता हमारे देश की संस्कृति के खिलाफ है। इसके लिए हमारे समाज में कोई गुंजाइश नहीं है। समलैंगिकता एक मानसिक विकृति है और इसे वैधानिक करने का मतलब है कि इस विकृति को आगे बढ़ाना”।
जव्वाद ने कहा कि समलैंगिकता से समाज में एचआईवी/एड्स जैसी घातक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा और समाज में बच्चों के खिलाफ अपराधों में भी वृद्धि होगी।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा कि वे इसे कानूनी मान्यता दिए जाने का विरोध करते हैं और वे केंद्र सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
समलैंगिकता कानून नहीं बदलेगा: मोइली
फिरंग महली ने कहा, “जल्द ही हम दूसरे धर्म के विद्वानों के साथ बैठकर कर इसके खिलाफ मजबूत कदम उठाएंगे। हम प्रधानमंत्री से मांग करेंगे कि समलैंगिकता को भारत में कानूनी मान्यता न दी जाए”।
दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर हिंदू संगठनों ने भी आपत्ति जताई है। उल्लेखनीय है कि धारा-377 के तहत समलैंगिकता और अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध माना जाता रहा है।
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13 फरवरी 2012
Jul 09, 2009
भगवान ने बहुत सोच समझ कर ही स्त्री-पुरुष बनाए हैं.स्त्री -पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं. एक के बिना दूसरे का अस्तीतत्व नहीं है. जिस तरह चीनी की जगह नमक और नमक की जगह चीनी का प्रयोग नहीं किया जा सकता. ठीक ऊसी तरह स्त्री की जगह पुरुष नहीं ले सकता और पुरुष की जगह स्त्री. सॅमलॅंगैक जोड़े जब सभी प्रक्रियाएं एक वैवाहित जोड़े की तारह करते हीं तो वे अपने से विपरीत लिंग से विवाह करके सुखी जीवन क्यों नहीं जीते.यह नियम तो जानवर भी जानते हैं फिर इंसान क्यों नहीं समझता.मा की जगह कोई नहीं ले सकता, पिता भी नही.
Naresh Suman Guree chandigarh
Jul 09, 2009
अगर पुरुष पुरुष के संग पति-पति की तरह जीवन बिताते हैं तो ऊन्हें एक औरत से विवीह करने में आपति क्यों? एक पुरुष वही संबंध एक स्त्री से विवाह कर के भी जीवन बिता सकता है.
suman naresh guree chandigarh
Jul 08, 2009
Main bhi apni rai rakhna chahta hoo ki agar section 377 main agar badlav hota hai toh hamarey desh k liye doob marney wali baat hai, ye kaam to wild life main bhi nahi hota hai ye log ye nahi samajh rahey ki kudrat k niyam ke khilaf na jaaye varna jaise videsho main sabhyata naam ki koi cheej nahi hai, vaise hi hamarey desh ka haal hoga, ha rape main jarror kami aayegi lekin hamarey yaha k ladkey bhi surksheet nahi rahengey.
Brahm deo Sharma Aligarh
Jul 08, 2009
गे सबनध को मन्यता देना भारत देस के लिए बहुत्र सरमनाक बात है. ये हमारी स्संकृति नही हे . भारत देस एक धार्मिक देस है. हम सब्को इस्का विरोध करना ज़रूरी है. इसे तो जानवर बी नही मानता
sofiya usa
Jul 06, 2009
मुझे एसा लगता है की हम हमेशा उस बात के बारे मे नही सोचते जिसके बारे मे सोचना चाहिए किसे सम्लेंगिक संबंध ब्नाने है ओर किसे नही ये उसका मामला है हम क्यो आपस मे बहस कर समय खराब कर रहे है अभी सोचना ही है तो देश की सुरक्षा ओर एकता के बारे मे सोचना चाहिए ना की इन बतो के बारे मे..........
himanshu dubey indore
Jul 06, 2009
ऐसे भी अपने समाज मे लड़कियोकि कमी होती जा रही है. ये उसके लिए आसान तरीका है अब कोई बिन ब्याही नही रहेगा लड़की नही तो लड़का ही सही इस क़ानून से कॉसमेटिक भी काफ़ी बेचा जाएगा हर कोई लड़का अपने आपकोसुंदर देखना पसंद करेगा, नज़ाने कोई लड़का पसंद करले, इन छक्के की शादी मे आना मत भूलना तुम्हारे आशीर्वाद की ज़रूरत है.वारे क़ानून उल्टी गंगा बहाने को मजूबूर करवा रहे हो
dilip choudhary mumbai
Jul 06, 2009
जिस जज ने ये फ़ैसला सुनाया है वो और उसका पूरा ख़ान दान ज़रूर गे होगा. जज साहब गेट वेल सून.
Rishi Gwalior
Jul 05, 2009
अपनी इच्छा पूर्ति कर रहे है करने दो भारतीय संस्कृति पर धब्बा लगाना चाहते है लगने दो यहां का कानून ही ऐसा है किसी भी मुददे को बिना सोचे-समझे निपटा देता है वैसे ऐसा करने से एक औरत की जरूरत अब खत्म हो जायेगी लगे रहो
sudhir meerut
Jul 05, 2009
सम्लेंगिकता को इसलिए बुद्धिमान लोग हामी भरने से दर रहे हेकयोकि इस मान्यता के परिणाम काफ़ी घातक होगे. इससे एड्स की बीमारी कई गुना फेल जाएगी ओर समाज मे एक बिकृत सोच को बड़ा वा मिलेगा. हम बिदेशो की नकल करने को अभी ते या र नही हे, इन देशो मे तो चोथी कक्षा मे ही बच्चो को सेक्स की खुले रूप मे शिक्षा दी जाती हे. इन लोगो को फिर भी सेक्स के मामले मे सुरक्षा का गयाँ न हे जबकि भारतीय लोगो के ली ए यह लत घातक हो सकती हे.
Shekhar Delhi
Jul 05, 2009
ओके मुजे पता है ये कमेंट शामिल नही होगा फिर भी एक कोशिश करते हैं. एक गे अपने डॉक्टर के पास मेडिकल रिपोर्टे लेने गया, डॉ. ने कहा तुम्हे एड्स है. गे ने पूछा ओह अब मै क्या करूं डॉ. साहब. डॉ. बोला घर जाओ, एक प्लेट दाल चावल ,10 कबाब ,एक प्लेट चाट, 6 समोसे, एक प्लेट बिरयानी और दही बढ़े खाओ, एक ग्लास छाछ पियो और बाद मे 15 20 हाजमोला की गोलियां खा लो. गे बोला तो क्या इससे मैं ठीक हो जाउंगा, डॉक्टर ने कहा, नही ठीक तो नही होगे पर तुमे ये ज़रूर पता चल जाएगा कि ईश्वर ने कौन सा अंग किस काम के लिये बनाया ह
Rustam Khan Bhopal
Jul 05, 2009
अगर दुनिया बचानी है तो इसको मत रोको इससे जनसंख्या नही बढ़ेगी सरकार को भी ज़्यादा पैसा खर्च करने की ज़रूरत नही पड़ेगी
alok luckniow
Jul 05, 2009
भाई लोग आप लोग क्यों इतना परेशान हो रहें है जो जिसको करना है वो कर के रहेगा और कर रहा है कोर्ट चाहे ऑर्डर करे या ना करे अगर आप के पास समान है तो उसको दोनो जगह ईस्तमाल करे अगर नही है तो परेशान होने की ज़रूरत नही दोनो जगह ईस्तमाल करवाएँ आप भाई और बहन लोग अपने हाथ से भी खूब आनंद लेते होंगे मैं तो यही कहूँगा की यही कम अगर दूसरे को करने दे तो उसको भी सहारा मिल जाएगा जो, अगर आप लोग सिक्सर होते तो क्या करते वो भी तो इंसान है और वो भी इसका आनंद ले ही रहे है
alok luckniow
Jul 05, 2009
मुझे लगता है की सारे लोग फुड़दू है . जो अपने देश को गंदे फ्यूचर की तरफ़ धकेल रहे है .एक हमारे हाइ कोर्ट के जड्ज को लेलो जिसने इनको मान्यता दे दी.वो भी फुदू है .अंत मे सिर्फ़ इतना कहना चाहता हू की जो हो रहा है वो अछा नही हो रहा है.
Amit Sharma Chandigarh
Jul 04, 2009
आप लोग भगवान के दिया हुए समान का इस्तेमाल क्यो नही करते है
rakesh ranjan thane
Jul 04, 2009
कुछ दिन मे कोट कहेगा की मार्जी से हत्या भी जाएज हैमार्जी क्या लोग अपनी सभायता भूलगए----कोट को सोचना चाहीीए था
rakesh ranjan thane
Jul 04, 2009
सरकार को सोचना चाहिए ये गंभीर मामला है --इस्से देश वासीयो को नुकसान होने वाला हैकुछ लोगो को थोक लगेगा पेर यह बहुत नुकसान पहुचाएगा
rakesh ranjan thane
Jul 04, 2009
अब तो tv पर समाचार देखने मैं शर्म आती है, क़ानून मंत्री को हटाओ !
Sunny New Delhi
Jul 04, 2009
मैं उन लोगों और संस्थाओं को बधाई देती हूँ जो वर्सों से समाज के इस वर्ग को सम्मान की जिंदगी दिलवाने का प्रयास क्रर रहे थेजेसे नाज़ फॉंडएसन
girija sahu new delhi
Jul 03, 2009
सम्लेंगिकता को बिल्कुल ही ख़त्म कर देना चाहिए यह सब हमारे स्माज के लिए ख़तरनख् सीध होगा सरकार कुछ करने से पहले सोचती नही करने से फ्ले कुछ लोगो से राय लेनी च्चिए
raju delhi
Jul 02, 2009
समलैंगिकता के उपर उच्च न्यायालय नें जो फ़ैसला सुनाया है उसका मैं स्वागत करता हूँ , परन्तु मैं सुंदरियों ( महिलाओं ) से यह ज़रूर कहना चाहूँगा की हमारे पास जो तुम्हारे लिए (पुस्र्ष -लिंग ) क़ुदरत ने जो चीज़ दी हुवी है , उसे भी कभी-कभी याद करके इस्तेमाल कर लिया करना ! अजय
अजय Chandigarh
Jul 02, 2009
भारतीय समाज की भलाई के लिए सभी धर्मो के प्रमुखो और संगठनो को एकजुट होकर सम्लेंगीकता का विरोध करना चाहिए. हमारा देश विदोषो से प्रभावित हो रहा हे. कल को हाइ कोर्ट बलात्कार को भी मान्यता दे देगी. और उनका क्या होगा जो सम्लेंगीकता के जुर्म मे सज़ा काट रहे हे, क्या उन्हे छोड़ दिया जाएगा और उजरं करने के लिए.. अब हमारे देश मे लड़कियो के साथ साथ लड़के भी असुरक्षी हो जाएगे, धीरज गर्ग इनडोर
dhiraj garg indore
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