07 मार्च 2009
रॉयटर्स
केप केनवरेल (अमेरिका)। धरती जैसे दूसरे ग्रह की तलाश के मकसद से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) ने फ्लोरिडा के केप केनवरेल से एक अनाम डेल्टा रॉकेट के जरिए एक दूरबीन को कल अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया।
“केपलर” नाम की यह दूरबीन आकाश गंगा के दूसरे छोर पर स्थित ग्रहों में यह टटोलने की कोशिश करेगी कि क्या इन ग्रहों में जीवन की कोई गुंजाइश है। इस दूरबीन का नामकरण सदी के महान खगोलविद जॉन केपलर के सम्मान में किया गया है।
अंतरिक्ष में जीवन खोजने जाएगा ‘केप्लर’
नासा के सहायक प्रशासनिक अधिकारी एड व्हीलर ने बताया कि नासा ने अब तक तीन सौ से अधिक ग्रहों का पता लगाया है, लेकिन उनमें से एक भी हमारी धरती जैसा नहीं है।
वैज्ञानिकों की योजना है कि “केपलर’ दूरबीन के जरिए लगभग एक लाख संभावित जगहों पर जिंदगी की पहचान का काम संपन्न किया जाए।
“केपलर” परियोजना के प्रबंधक जिम फन्सैन ने बताया कि इतनी विशालकाय मंदाकिनी में धरती जैसे किसी ग्रह की खोज करना बेहद मुश्किल काम है।
‘मंगल उड़ान शोध’ के लिए 6 चुने गए
मसलन बृहस्पति जैसे विशालकाय ग्रह, कार की हेडलाइट में दिखाई पड़ने वाले किसी मच्छर की तरह दिखते हैं। ऐसे में धरती जो कि बृहस्पति से कई गुना छोटी है उसे ढूंढना वाकई कठिन है। इतना ही नहीं इसमें लगने वाला समय भी धैर्य की कड़ी परीक्षा लेगा।
नासा को आशा है कि 5910 लाख डॉलर वाली यह परियोजना अपने मकसद में सफल होगी।
कार्नेगी इंस्टिट्यूशन ऑफ वॉशिंगटन से जुड़े खगोलविद एलन बास ने कहा कि अगर “केपलर” दूरबीन अपने उद्देश्य में असफल रही तो यह बेहद आश्चर्य में डालने जैसा होगा। उन्होंने कहा वह सोचते हैं कि इसे धरती जैसी एक नहीं बल्कि कई धरती मिल सकती हैं।
अंतरिक्ष में टकराए रुसी और अमेरिकी उपग्रह
इस बीच नासा के प्रबंधकों ने शुक्रवार को अंतरिक्ष यान “डिस्कवरी” को आगामी बुधवार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण के इरादे से भेजने की अनुमति दे दी। इसे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से छोड़ा जाएगा। यह यान अपने साथ अमेरिका निर्मित सौर ऊर्जा के पैनल लेकर जाएगा।
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पाठकों की राय
13 फरवरी 2012
Mar 09, 2009
जल्दी खोजो धरती ख़तम होने वाली है! और धरती का भी सुधार करते रहो कहीं इसको भी गवाँ बैठो
Balram Rohilla Badshah pur gurgaon
Mar 07, 2009
एक धरती जो इंसानो को मिली हुई है वही उससे ठीक से नही रखी जा रही है, चले हैं दूसरी धरती खोजने
Rakesh Delhi
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