27 नवंबर 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
पटना। बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों में से एक बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन पर बौद्ध भिक्षु अपना नियंत्रण चाहते हैं। बिहार सरकार द्वारा इस ओर ध्यान न दिए जाने पर उन्होंने अपने आंदोलन में तेजी लाने का निर्णय किया है।
बौद्ध भिक्षु एक लंबे समय से बोधगया स्थित 1,500 वर्ष पुराने मंदिर पर अपने पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रहे हैं। पटना से 110 किलोमीटर दूर स्थित बोधगया में ही 2,550 वर्ष पहले गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी।
बोधगया: शाकाहारी क्षेत्र घोषित करने का अभियान
मंदिर प्रबंधन पर बौद्धों का नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए महाबोधि मंदिर प्रबंधन कानून, 1949 में आवश्यक संशोधन में हो रही देरी से बौद्ध भिक्षु बिहार सरकार से नाखुश हैं।
‘बोधगया महाबोधि विहार अखिल भारतीय कार्यवाही समिति’ के अध्यक्ष भदंत आनंद का कहना है, "यह स्पष्ट है कि बिहार सरकार महाबोधि मंदिर पर पूरे नियंत्रण की बौद्धों की जायज मांग का समर्थन नहीं करना चाहती है। हम लोगों का समर्थन जुटाकर इसके लिए लड़ेंगे।"
आध्यात्म व इतिहास का मेल है बोधगया
आनंद ने शुक्रवार को आईएएनएस से फोन पर कहा कि समिति ने महाबोधि मंदिर पर पूर्ण नियंत्रण के लिए पूरे देश में समिति का विस्तार कर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है।
आनंद का कहना है कि सरकार एक षड्यंत्र के तहत प्रबंधन पर गैर बौद्धों का नियंत्रण रखने के लिए इस संशोधन में विलंब कर रही है।
वर्तमान कानून के मुताबिक बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीजीटीएमसी) में चार बौद्ध सदस्य और इतनी ही संख्या में हिंदू सदस्य होने चाहिए। उन्हें तीन साल के लिए चुना जाता है। गया के जिला मजिस्ट्रेट को इसका पदेन अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।
सांची में बनेगा ‘बौद्ध पर्यटन गांव’
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
पटना। बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों में से एक बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन पर बौद्ध भिक्षु अपना नियंत्रण चाहते हैं। बिहार सरकार द्वारा इस ओर ध्यान न दिए जाने पर उन्होंने अपने आंदोलन में तेजी लाने का निर्णय किया है।
बौद्ध भिक्षु एक लंबे समय से बोधगया स्थित 1,500 वर्ष पुराने मंदिर पर अपने पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रहे हैं। पटना से 110 किलोमीटर दूर स्थित बोधगया में ही 2,550 वर्ष पहले गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी।
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मंदिर प्रबंधन पर बौद्धों का नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए महाबोधि मंदिर प्रबंधन कानून, 1949 में आवश्यक संशोधन में हो रही देरी से बौद्ध भिक्षु बिहार सरकार से नाखुश हैं।
‘बोधगया महाबोधि विहार अखिल भारतीय कार्यवाही समिति’ के अध्यक्ष भदंत आनंद का कहना है, "यह स्पष्ट है कि बिहार सरकार महाबोधि मंदिर पर पूरे नियंत्रण की बौद्धों की जायज मांग का समर्थन नहीं करना चाहती है। हम लोगों का समर्थन जुटाकर इसके लिए लड़ेंगे।"
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वर्तमान कानून के मुताबिक बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीजीटीएमसी) में चार बौद्ध सदस्य और इतनी ही संख्या में हिंदू सदस्य होने चाहिए। उन्हें तीन साल के लिए चुना जाता है। गया के जिला मजिस्ट्रेट को इसका पदेन अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।
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