06 नवंबर 2009
वार्ता
मुंबई। केंद्र सरकार ने 26/11 के हमले के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के जवानों को गवाही देने के लिए जारी दिशानिर्देश कल बम्बई उच्च न्यायालय में जमा कर दिये।
खंडपीठ के न्यायाधीश जे एन पटेल और न्यायाधीश अमजद सयीद ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल याचिका पर शुक्रवार तक के लिए आदेश सुरक्षित रखा है। केंद्र की याचिका में मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय में एनएसजी कमांडो को सुनवाई के दौरान गवाही देने के लिए हाजिर होने के आदेश को चुनौती दी गयी थी।
केंद्र सरकार ने कमांडो के हाजिर होने के संबंध में दिशानिर्देश में कहा है कि अदालत वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करे और गवाही में हाजिर कमांडो के नाम मीडिया में जाहिर नहीं करे। इसके अलावा कमांडो से यह नहीं पूछा जाय कि उन्होंने कार्रवाई के दौरान कौन सी रणनीति अपनायी।
पहले याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक आदेश दिया गया था कि सरकारी वकील और विपक्ष के वकील आतंकवादियों को काबू करने के मामले में कमाडो की रणनीति के संबंध में पूछताछ नहीं करें। केवल कार्रवाई के संबंध में उनसे जो जरूरी हो उस संदर्भ में ही थोड़ा बहुत पूछताछ की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि तीन कमांडो (जिन्हें अदालत ने समन किया है) के अलावा अन्य कमांडो को गवाह के रूप में बुलाने के लिए राज्य को उच्च न्यायालय से आदेश लेना होगा।
अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल डारियस खंबाटा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि बनकर अदालत में हाजिर हुए थे। उन्होंने विशेष अदालत द्वारा कमांडो के अदालत में हाजिर होने से कुछ राज खुलने की बात का विरोध किया। विशेष अदालत के न्यायाधीश एम एल तहलियानी ने गवाह के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्डों को गवाह के रूप में हाजिर होने के लिए समन किया था। समन किये जाने वाले कमांडो में लेफ्टीनेंट कर्नल राकेश कुमार शर्मा, मेजर रवींद्र प्रकाश और कैप्टन अनिल जाखड शामिल हैं। तीनों कमांडो होटल ताज महल, ओबेरॉय और नरीमन हाउस में कार्रवाई दल के हिस्सा थे।
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मुंबई। केंद्र सरकार ने 26/11 के हमले के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के जवानों को गवाही देने के लिए जारी दिशानिर्देश कल बम्बई उच्च न्यायालय में जमा कर दिये।
खंडपीठ के न्यायाधीश जे एन पटेल और न्यायाधीश अमजद सयीद ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल याचिका पर शुक्रवार तक के लिए आदेश सुरक्षित रखा है। केंद्र की याचिका में मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय में एनएसजी कमांडो को सुनवाई के दौरान गवाही देने के लिए हाजिर होने के आदेश को चुनौती दी गयी थी।
केंद्र सरकार ने कमांडो के हाजिर होने के संबंध में दिशानिर्देश में कहा है कि अदालत वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करे और गवाही में हाजिर कमांडो के नाम मीडिया में जाहिर नहीं करे। इसके अलावा कमांडो से यह नहीं पूछा जाय कि उन्होंने कार्रवाई के दौरान कौन सी रणनीति अपनायी।
पहले याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक आदेश दिया गया था कि सरकारी वकील और विपक्ष के वकील आतंकवादियों को काबू करने के मामले में कमाडो की रणनीति के संबंध में पूछताछ नहीं करें। केवल कार्रवाई के संबंध में उनसे जो जरूरी हो उस संदर्भ में ही थोड़ा बहुत पूछताछ की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि तीन कमांडो (जिन्हें अदालत ने समन किया है) के अलावा अन्य कमांडो को गवाह के रूप में बुलाने के लिए राज्य को उच्च न्यायालय से आदेश लेना होगा।
अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल डारियस खंबाटा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि बनकर अदालत में हाजिर हुए थे। उन्होंने विशेष अदालत द्वारा कमांडो के अदालत में हाजिर होने से कुछ राज खुलने की बात का विरोध किया। विशेष अदालत के न्यायाधीश एम एल तहलियानी ने गवाह के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्डों को गवाह के रूप में हाजिर होने के लिए समन किया था। समन किये जाने वाले कमांडो में लेफ्टीनेंट कर्नल राकेश कुमार शर्मा, मेजर रवींद्र प्रकाश और कैप्टन अनिल जाखड शामिल हैं। तीनों कमांडो होटल ताज महल, ओबेरॉय और नरीमन हाउस में कार्रवाई दल के हिस्सा थे।
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