13 जुलाई 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
पटना। झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध शैव तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम का शिव मंदिर बारह ज्योर्तिलिंगों में सर्वाधिक महिमामंडित है। इस मंदिर में लम्बे समय से चले आ रहे एक धार्मिक अनुष्ठान को यहां आने वाला हर भक्त करना चाहता है।
लोगों का मानना है कि ‘गठजोड़वा’ या ‘गठबंधन’ के नाम से प्रचलित इस अनुष्ठान को करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है तथा राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
पढ़ें: शिवजी के लिए 51 फुट लंबा कांवड़
बैद्यनाथ मंदिर के शिखर से लेकर माता पार्वती मंदिर के शिखर तक ग्रंथिबंधन को ‘गठबंधन’ या ‘गठजोड़वा’ के नाम से जाना जाता है। गौरतलब है कि यह बंधन कोई पुरोहित नहीं करते बल्कि प्राचीनकाल से यह गठबंधन का कार्य मंदिर के ऊपर चढ़कर पिछड़ी जाति के एक ही परिवार के लोग करते आ रहे हैं। यह गठबंधन ‘लाल रज्जु’ से निर्मित होता है। इस अनुष्ठान में पति-पत्नी दोनों ही सम्मिलित होते हैं।
इस गठबंधन के लिए मंदिर के शिखर पर चढ़ने वाले विनोद राउत बताते हैं कि इस गठबंधन को हमारे पूर्वज करते थे और आज हम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परम्परा निर्वाह करने से अच्छी आमदनी हो जाती है, जिससे पूरा परिवार चलता है। उन्होंने बताया कि सावन माह में गठबंधन करने वाले भक्तों की कमी अवश्य हो जाती है, परंतु अन्य दिनों में यह गठबंधन करने के लिए प्रतिदिन 45 से 50 की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
पढ़ें: सावन में शिव भक्त पहुंचे बैद्यनाथ धाम
इसी परिवार के सुनील राउत कहते हैं कि मंदिर के ऊपर जाने के लिए एक मोटी जंजीर लगी है जिसके सहारे दोनों मंदिर पर चढ़ा जाता है। वे बताते हैं कि गठबंधन के संकल्प के बाद वे आगे शिव मंदिर के शिखर पर गठबंधन करते हैं। इस दौरान भक्त उस लाल रज्जु को पकड़े रहते हैं। इसके बाद भक्त ही इस लाल रज्जु को पार्वती मंदिर तक ले जाते हैं, जहां हम लोग उसे लेकर फिर पार्वती के मंदिर के शिखर में बांध देते हैं।
गठबंधन के विषय में मंदिर के मुख्य पुरोहित दुर्लभ मिश्र का कहना है कि यह अनुष्ठान काफी प्राचीन है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में भी गठबंधन तथा ध्वज चढ़ाने का उल्लेख मिलता है। इस पुनीत कार्य से जहां भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वहीं इसके करने से लोगों को राजसूय यज्ञ का फल भी प्राप्त होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
पटना। झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध शैव तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम का शिव मंदिर बारह ज्योर्तिलिंगों में सर्वाधिक महिमामंडित है। इस मंदिर में लम्बे समय से चले आ रहे एक धार्मिक अनुष्ठान को यहां आने वाला हर भक्त करना चाहता है।
लोगों का मानना है कि ‘गठजोड़वा’ या ‘गठबंधन’ के नाम से प्रचलित इस अनुष्ठान को करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है तथा राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
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बैद्यनाथ मंदिर के शिखर से लेकर माता पार्वती मंदिर के शिखर तक ग्रंथिबंधन को ‘गठबंधन’ या ‘गठजोड़वा’ के नाम से जाना जाता है। गौरतलब है कि यह बंधन कोई पुरोहित नहीं करते बल्कि प्राचीनकाल से यह गठबंधन का कार्य मंदिर के ऊपर चढ़कर पिछड़ी जाति के एक ही परिवार के लोग करते आ रहे हैं। यह गठबंधन ‘लाल रज्जु’ से निर्मित होता है। इस अनुष्ठान में पति-पत्नी दोनों ही सम्मिलित होते हैं।
इस गठबंधन के लिए मंदिर के शिखर पर चढ़ने वाले विनोद राउत बताते हैं कि इस गठबंधन को हमारे पूर्वज करते थे और आज हम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परम्परा निर्वाह करने से अच्छी आमदनी हो जाती है, जिससे पूरा परिवार चलता है। उन्होंने बताया कि सावन माह में गठबंधन करने वाले भक्तों की कमी अवश्य हो जाती है, परंतु अन्य दिनों में यह गठबंधन करने के लिए प्रतिदिन 45 से 50 की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
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इसी परिवार के सुनील राउत कहते हैं कि मंदिर के ऊपर जाने के लिए एक मोटी जंजीर लगी है जिसके सहारे दोनों मंदिर पर चढ़ा जाता है। वे बताते हैं कि गठबंधन के संकल्प के बाद वे आगे शिव मंदिर के शिखर पर गठबंधन करते हैं। इस दौरान भक्त उस लाल रज्जु को पकड़े रहते हैं। इसके बाद भक्त ही इस लाल रज्जु को पार्वती मंदिर तक ले जाते हैं, जहां हम लोग उसे लेकर फिर पार्वती के मंदिर के शिखर में बांध देते हैं।
गठबंधन के विषय में मंदिर के मुख्य पुरोहित दुर्लभ मिश्र का कहना है कि यह अनुष्ठान काफी प्राचीन है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में भी गठबंधन तथा ध्वज चढ़ाने का उल्लेख मिलता है। इस पुनीत कार्य से जहां भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वहीं इसके करने से लोगों को राजसूय यज्ञ का फल भी प्राप्त होता है।
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