11 जुलाई 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
बृज खंडेलवाल
आगरा। मुगल बादशाह शाहजहां के सालाना उर्स के अवसर पर 19 जुलाई से ताजमहल में तीन दिनों के निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था पर संरक्षणविदों ने चिंता प्रकट की है कि क्या ताज इतने अधिक पर्यटकों का भार वहन कर लेगा।
ब्रज मंडल हेरिटेज कंजरवेशन सोसाइटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा, “भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के विशेषज्ञ और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ही पिछले कुछ वर्षों से स्मारक में आने वाले लोगों की क्षमता से चिंचित हैं और यह एक गम्भीर मसला है।”
जलती चिताओं से काला हो रहा है ताजमहल
इतिहासकार आर.नाथ ने भी लोगों के बढ़ती संख्या के मद्देनजर स्मारक की सुरक्षा पर चिंता जताई है।
एक गाइड ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान अजमेर से लौट रहे मुस्लिम तीर्थयात्रियों के कारण ताजमहल पर लोगों का भारी दबाव है। गत शुक्रवार को प्रवेश निःशुल्क होने के कारण बहुत अधिक संख्या में लोगों ने न केवल ताजमहल के अंदर नमाज अदा की बल्कि उसका भ्रमण भी किया।
यमुना में पानी घटने से ताज की सुरक्षा अधूरी
उल्लेखनीय है कि स्थानीय प्रशासन ने अजमेर से आने वाले तीर्थयात्रियों-पर्यटकों के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की है। जिसका नतीजा यह है कि ताजमहल के आसपास का पूरा इलाका कूड़े करकट के ढेर में तब्दील हो गया है।
पर्यावरणविद रवि सिंह ने आईएएनएस को बताया, “ताजमहल अथवा किसी भी अन्य स्मारक की वहन क्षमता के मुद्दे का हल उस स्मारक के हितों को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाना चाहिए। कई बार तो ताज में आने वाले पर्यटकों की संख्या 20,000 तक पहुंच जाती है। निश्चित रूप से इसका असर स्मारक पर कई तरह से पड़ता है।”
ताजमहल की देखभाल करेंगी निजी कंपनियां
उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब सर्वोच्च न्यायालय को पर्यटकों की संख्या निर्धारित करनी पड़ेगी या फिर उस पर प्रतिबंध ही लगाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटकों का दबाव कम करने के लिए टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग अथवा अग्रिम बुकिंग शुरू की जानी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
बृज खंडेलवाल
आगरा। मुगल बादशाह शाहजहां के सालाना उर्स के अवसर पर 19 जुलाई से ताजमहल में तीन दिनों के निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था पर संरक्षणविदों ने चिंता प्रकट की है कि क्या ताज इतने अधिक पर्यटकों का भार वहन कर लेगा।
ब्रज मंडल हेरिटेज कंजरवेशन सोसाइटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा, “भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के विशेषज्ञ और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ही पिछले कुछ वर्षों से स्मारक में आने वाले लोगों की क्षमता से चिंचित हैं और यह एक गम्भीर मसला है।”
जलती चिताओं से काला हो रहा है ताजमहल
इतिहासकार आर.नाथ ने भी लोगों के बढ़ती संख्या के मद्देनजर स्मारक की सुरक्षा पर चिंता जताई है।
एक गाइड ने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान अजमेर से लौट रहे मुस्लिम तीर्थयात्रियों के कारण ताजमहल पर लोगों का भारी दबाव है। गत शुक्रवार को प्रवेश निःशुल्क होने के कारण बहुत अधिक संख्या में लोगों ने न केवल ताजमहल के अंदर नमाज अदा की बल्कि उसका भ्रमण भी किया।
यमुना में पानी घटने से ताज की सुरक्षा अधूरी
उल्लेखनीय है कि स्थानीय प्रशासन ने अजमेर से आने वाले तीर्थयात्रियों-पर्यटकों के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की है। जिसका नतीजा यह है कि ताजमहल के आसपास का पूरा इलाका कूड़े करकट के ढेर में तब्दील हो गया है।
पर्यावरणविद रवि सिंह ने आईएएनएस को बताया, “ताजमहल अथवा किसी भी अन्य स्मारक की वहन क्षमता के मुद्दे का हल उस स्मारक के हितों को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाना चाहिए। कई बार तो ताज में आने वाले पर्यटकों की संख्या 20,000 तक पहुंच जाती है। निश्चित रूप से इसका असर स्मारक पर कई तरह से पड़ता है।”
ताजमहल की देखभाल करेंगी निजी कंपनियां
उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब सर्वोच्च न्यायालय को पर्यटकों की संख्या निर्धारित करनी पड़ेगी या फिर उस पर प्रतिबंध ही लगाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटकों का दबाव कम करने के लिए टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग अथवा अग्रिम बुकिंग शुरू की जानी चाहिए।
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