15 फरवरी 2012
जीवन में याद रखें

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अपने स्वभाव में सुधार

मनुष्य सारी जिन्दगी लड़ता है अपनी परिस्थिति सुधारने के लिए। काश!थोड़ा प्रयास वह अपनी प्रकृति सुधारने के लिए भी करता। यदि वह ऐसा करता तब परिस्थिति सुधरते देर नहीं लगती।

 स्वीकार की भावना

 जो आदमी सब कुछ स्वीकार कर सके, वही समझदार है। जो ‘यह स्वीकार,वह अस्वीकार’ का भाव रखता है, वह नासमझ है। समझदार व्यक्ति काल के इस कुचक्र को देख कर, उदासीनता का लबादा ओढ़ने में ही अपनी भलाई और सुरक्षा समझता है। उदासीनता का यह नरम लबादा उनके लिए एक अभेद्य कवच का काम करता है।  

-- पूनम चन्द रतेरिया ‘ऋषिपुत्र’

(साभारः विवेक दृष्टि, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित। )

 

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पाठकों की राय

15 फरवरी 2012

Oct 26, 2009

ये बिचार काफ़ी अच्छा है मई इसी विचार की हू

sadhana lucknow

Jul 16, 2009

अगर समज के समजे तो सही है

raju delhi

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