31 अक्टूबर 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने शनिवार को यहां कहा कि यह समझौता विश्व के लिए भारत का पासपोर्ट है।
समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए 'एचटी लीडरशिप समिट' में बुश ने कहा कि इससे बिना प्रदूषण फैलाए भारत को ऊर्जा उत्पादन का अवसर मिलेगा।
बुश ने कहा,"(समझौते पर हस्ताक्षर करके) अमेरिका ने भारतीय परमाणु हथियार कार्यक्रम को मान्यता दी। दुनिया के लिए यह भारत का पासपोर्ट है।"
बुश ने कहा,"वर्ष 2006 में हमने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, अब भारत के पास बिना प्रदूषण फैलाए ऊर्जा उत्पादित करने का विकल्प है।"
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का प्रारूप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का 18 जुलाई 2005 को जारी संयुक्त वक्तव्य था। इसके तहत भारत अपने सैन्य और नागरिक परमाणु कार्यक्रमों को अलग-अलग करने पर सहमत हो गया था।
भारत अपने नागरिक परमाणु प्रतिष्ठानों को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा नियमों के तहत रखने पर भी राजी हो गया। इसके बदले में अमेरिका भारत के साथ असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हो गया।
बुश ने किया सुरक्षा परिषद में भारत के दावे का समर्थन
जॉर्ज बुश ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट’ में आगे कहा,“हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए एक सीट की संभावना को जरूर देखना चाहिए।”
उन्होंने कहा,“विश्व में भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है। भारत सहिष्णु, शांतिपूर्ण और विभिन्न धर्मोंवाला लोकतंत्र है। जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका नेतृत्व करनेवाले देश की है।”
बुश ने कहा कि वे भारत में ‘यात्री’ की तरह आए हैं और इस देश के ‘प्रशंसक’ हैं।
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