01 जुलाई 2009
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
वेंकटाचारी जगन्नाथन
चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अगस्त में यूरोपीय देशों के छह छोटे उपग्रहों के साथ अपने दूसरे समुद्री निगरानी उपग्रह का प्रक्षेपण करने की तैयारियों में जुटा है।
इसरो के निदेशक (प्रकाशन और जनसंपर्क) एस. सतीश ने बेंगलुरू से फोन पर ‘आईएएनएस’ को बताया, “इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-14) से ‘ओशनसेट-2’ को 720 किलोमीटर ऊपर सूर्य की समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। यह ‘ओशनसेट-1’ का स्थान लेगा”।
उनके अनुसार अपनी कक्षा में विस्तृत पहुंच के बल पर उपग्रह समुद्र के समान क्षेत्र का दो दिनों में सर्वेक्षण करने में सक्षम होगा।
‘ओशनसेट-2’ का उपयोग संभावित मत्स्य क्षेत्रों का पता लगाने, समुद्र की स्थिति और मौसम की भविष्यवाणी करने तथा जलवायु अध्ययन के लिए किया जाएगा।
इसरो द्वारा विकसित ‘ओशन कलर मॉनीटर’ (ओसीएम) और ‘केयू- बैंड पेंसिल बीम स्कैटेरोमीटर’ के साथ ही सेटेलाइट इटली की अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा विकसित ‘रेडियो ऑक्युलेशन साउंडर फॉर एटमास्फीयरिक स्टडीज’ (आरओएसए) से युक्त है।
“अंतरिक्ष में जीवन है, लेकिन बहुत दूर”
‘स्कैटेरोमीटर’ 50 गुणा 50 किलोमीटर क्षेत्र में हवाओं की स्थिति और उनकी दिशा की सही जानकारी उपलब्ध कराएगा।
‘ओशनसेट-2’ का जीवनकाल पांच वर्ष निर्धारित किया गया है लेकिन इसका कार्यकाल उसके बाद भी जारी रह सकता है। जैसा कि ‘ओशनसेट-1’ के मामले में हुआ, वर्ष 1999 में कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद वह अभी तक काम कर रहा है।
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