23 जून 2009
वार्ता
नयी दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 70 डालर प्रति बैरल तक बढ जाने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय में पेट्रोल- डीजल के खुदरा दाम की समीक्षा होने लगी है। इसे देखते हुये निकट भविष्य में इनके दाम बढने की संभावना बढ गई है।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक तेल कंपनियों की खस्ता माली हालात को देखते हुये सरकार हर संभव उपाय पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार मजबूती की तरफ बढ रहे हैं. ऐसे में तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल की बिक्री पर पांच रुपये से अधिक, डीजल पर ढाई रुपये से अधिक और मिट्टी तेल पर 12.16 रुपये लीटर का नुकसान उठाना पड रहा है। रसोई गैस सिलेंडर पर कंपनियां 67 रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
सरकार तेल कंपनियों पर अधिक बोझ नहीं बढने देना चाहती है अन्यथा कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिये उसे फिर से तेल बांड जारी करने होंगे। उधर बजट में बढते वित्तीय घाटे को देखते हुये भी सरकार नये तेल बांड जारी करने से बचना चाहती है।
ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही पेट्रोल- डीजल के दाम बढा सकती है। इसके अलावा आने वाले बजट में पेट्रोलियम क्षेत्र में सरकार नये नीतिगत कदम भी उठा सकती है।
इनमें तेल कंपनियों को सीमित दायरे में पेट्रोल- डीजल के दाम खुद तय करने की आजादी और तेल एवं गैस उत्पादन पर रायल्टी नियमों में बदलाव जैसे अहम् मुद्दे शामिल हैं।
वार्ता
नयी दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 70 डालर प्रति बैरल तक बढ जाने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय में पेट्रोल- डीजल के खुदरा दाम की समीक्षा होने लगी है। इसे देखते हुये निकट भविष्य में इनके दाम बढने की संभावना बढ गई है।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक तेल कंपनियों की खस्ता माली हालात को देखते हुये सरकार हर संभव उपाय पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार मजबूती की तरफ बढ रहे हैं. ऐसे में तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल की बिक्री पर पांच रुपये से अधिक, डीजल पर ढाई रुपये से अधिक और मिट्टी तेल पर 12.16 रुपये लीटर का नुकसान उठाना पड रहा है। रसोई गैस सिलेंडर पर कंपनियां 67 रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
सरकार तेल कंपनियों पर अधिक बोझ नहीं बढने देना चाहती है अन्यथा कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिये उसे फिर से तेल बांड जारी करने होंगे। उधर बजट में बढते वित्तीय घाटे को देखते हुये भी सरकार नये तेल बांड जारी करने से बचना चाहती है।
ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही पेट्रोल- डीजल के दाम बढा सकती है। इसके अलावा आने वाले बजट में पेट्रोलियम क्षेत्र में सरकार नये नीतिगत कदम भी उठा सकती है।
इनमें तेल कंपनियों को सीमित दायरे में पेट्रोल- डीजल के दाम खुद तय करने की आजादी और तेल एवं गैस उत्पादन पर रायल्टी नियमों में बदलाव जैसे अहम् मुद्दे शामिल हैं।
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