25 मई 2009
वार्ता
तेहरान। ईरान से पाकिस्तान के लिए प्राकृतिक गैस के निर्यात पर दोनों देशों के बीच समझौता होने की खबरों के एक दिन बाद ईरान ने आज कहा कि भारत यदि चाहे तो अब भी पाकिस्तान-ईरान गैस पाइपलाइन से जुड़ सकता है।
भारत इस तथाकथित सात अरब डॉलर की शांति पाइपलाइन परियोजना का हिस्सा रहा है लेकिन पिछले वर्ष सितम्बर में पाकिस्तान के साथ ‘ट्रांजिट’ शुल्क संबंधी विवाद के कारण भारत इस परियोजना की बातचीत से अलग हो गया था।
इधर तेजी से बदले घटनाक्रम के बीच यहां के अखबारों में कल खबर आई कि ईरान और पाकिस्तान के बीच गैस पाइपलाइन मसले पर समझौता हो गया है। ईरान सरकार ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हसन कासकवी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से जुड़े विवरण की विस्तुत जानकारी बाद में दी जाएगी।
कासकवी से जब पूछा गया कि इस परियोजना में भारत की स्थिति क्या है तो उन्होंने कहा कि भारत जब चाहे इस परियोजना से जुड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए इस परियोजना से जुड़ने में कहीं कोई अड़चन नहीं है।
ईरान, दुनिया में रूस के बाद दूसरा सबसे बड़ा गैस भंडार वाला क्षेत्र है लेकिन गोपनीय परमाणु कार्यक्रम के आरोप में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की वजह से वह लगातार कई सालों से प्रतिबंध झेल रहा है। इस कारण वह गैस से जुड़े विकास कार्यों में पिछड़ गया है और कहा जा रहा है कि वह इन कारणों से कई दशक तक गैस निर्यात के क्षेत्र में बहुत आगे नहीं निकल पाएगा।
वार्ता
तेहरान। ईरान से पाकिस्तान के लिए प्राकृतिक गैस के निर्यात पर दोनों देशों के बीच समझौता होने की खबरों के एक दिन बाद ईरान ने आज कहा कि भारत यदि चाहे तो अब भी पाकिस्तान-ईरान गैस पाइपलाइन से जुड़ सकता है।
भारत इस तथाकथित सात अरब डॉलर की शांति पाइपलाइन परियोजना का हिस्सा रहा है लेकिन पिछले वर्ष सितम्बर में पाकिस्तान के साथ ‘ट्रांजिट’ शुल्क संबंधी विवाद के कारण भारत इस परियोजना की बातचीत से अलग हो गया था।
इधर तेजी से बदले घटनाक्रम के बीच यहां के अखबारों में कल खबर आई कि ईरान और पाकिस्तान के बीच गैस पाइपलाइन मसले पर समझौता हो गया है। ईरान सरकार ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हसन कासकवी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से जुड़े विवरण की विस्तुत जानकारी बाद में दी जाएगी।
कासकवी से जब पूछा गया कि इस परियोजना में भारत की स्थिति क्या है तो उन्होंने कहा कि भारत जब चाहे इस परियोजना से जुड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए इस परियोजना से जुड़ने में कहीं कोई अड़चन नहीं है।
ईरान, दुनिया में रूस के बाद दूसरा सबसे बड़ा गैस भंडार वाला क्षेत्र है लेकिन गोपनीय परमाणु कार्यक्रम के आरोप में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की वजह से वह लगातार कई सालों से प्रतिबंध झेल रहा है। इस कारण वह गैस से जुड़े विकास कार्यों में पिछड़ गया है और कहा जा रहा है कि वह इन कारणों से कई दशक तक गैस निर्यात के क्षेत्र में बहुत आगे नहीं निकल पाएगा।
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 3 वोट मिले
सम्बंधित ख़बरे -
ख़बरें
- बैंक ऑफ बड़ौदा विदेशों में 100 शाखाएं खोलेगा
- जल्द शुरू होगी 2जी लाइसेंस रद्द होने की प्रक्रिया
- दिसंबर में आईआईपी दर घटकर 1.8% पर पहुंची
- जनवरी माह में देश का निर्यात 10.1% बढ़ा
- रियायत देने से मेरी नींद उड़ जाती है: वित्त मंत्री
- बढ़ती महंगाई की मार से भारत हुआ बाहर: प्रणव मुखर्जी
- 28 फरवरी को बैंकों की देशव्यापी हड़ताल
- नए साल में हुआ जॉब मार्केट में सुधार!
- प्रणब 16 मार्च को पेश करेंगे आम बजट
- एयर इंडिया को राहत, एफडीआई पर फैसला नहीं
प्रमुख ख़बरें
- खुर्शीद मुश्किल में, राष्ट्रपति से की गई शिकायत
- ब्रिटेन में एक और भारतीय छात्र पर हमला
- सम्मान की जंग नहीं जीत सके सेना प्रमुख
- मालदीव संकट के समाधान के लिए भारत आगे आया
- बटला की तस्वीरें देखकर रो पड़ी थीं सोनिया: खुर्शीद
- यूरोप: ठंड से 450 की मौत, जीवनरेखा डेन्यूब भी जम गई
- सेना प्रमुख हार गए ‘उम्र विवाद’ की जंग!
- सर्वोच्च न्यायालय में सरकार झुकी, आदेश से पीछे हटी
- भारत की एकता, सम्प्रभुता पर था 26/11 हमला: न्यायालय
- सिमी के खिलाफ और दो साल का प्रतिबंध
आज के वीडियो
ख़बरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
तस्वीरें
क्रिकेट समाचार
Live TV | Stock Market India | IBNLive News | IBNKhabar Hindi News | Cricket News | In.com | हमारे बारे में | हमारा पता | हमें बताइए | विज्ञापन | अस्वीकरण | गोपनीयता | शर्तें | साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.






















