04 दिसम्बर 2008
जोश 18
मुम्बई। यहां हुए आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि और नेताओं के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए ठीक एक सप्ताह बाद, कल यानी बुधवार 3 दिसम्बर को, गेट वे ऑफ इंडिया पर शाम छह बजे जनसैलाब उमड़ पड़ा।
अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए लोगों ने हाथों में तख्तियां उठा रखी थीं जिनके अधिकांश संदेश नेताओं के नाम थे। ये संदेश राजनेताओं के प्रति देश के दिल में भड़के आक्रोश और नफरत के परिचायक थे।
कुछ संदेश इस प्रकार थे:
“मि. देशमुख डोंट प्ले अ जोकर, रिमेम्बर यू आर अवर नौकर” (जोकर बनने की कोशिश मत करिए मि. देशमुख, याद रखिए आप हमारे नौकर हैं)
“मुख्यमंत्री जनाब, रामगोपाल वर्मा को ताज घुमाने ले जाने के बजाए आतंकवादियों को “रामगोपाल वर्मा की आग” फिल्म दिखा देते तो वे खुद ही को मार डालते.”
“ 1947 में गांधीगीरी ने आजादी दिलाई. अब वक्त है ए के- 47 उठाने का”.
“हमारे घरों में कुत्तों का स्वागत है, नेताओं का नहीं.”
“ श्री 420” ( देशमुख की फोटो के साथ)
“ दुनिया के नेताओं को मुम्बई की भेंट” (चूड़ियों की फोटो के साथ)
“ये कहीं दिखाई दिए क्या?” ( राज ठाकरे की फोटो के साथ)
“ हलो राज, तुम्हारी ऑडी कार की कीमत क्या है? मराठी भाई- बहनों को उल्लू बनाना छोड़ो और जाओ अपने “बिजनेस” में ध्यान लगाओ.”
“मैं भारतीय हूं और सिर्फ एक सेना में विश्वास रखता हूं- भारतीय सेना में”.
“इस रैली में कुत्तों और नेताओं का आना मना है.”
“राज ठाकरे के “बंद”, आर आर पाटिल की छोटी बातें, नकवी के लिपिस्टिक और पाउडर, देशमुख का आतंकवाद- भ्रमण और अ-च्युतानंदन के कुत्ते नहीं चलता अब.”
“देशमूर्ख”- रामगोपाल वर्मा की फिल्म. हीरो वही, जिसे आप जानते हैं।“
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पाठकों की राय
13 फरवरी 2012
Dec 14, 2008
नेताओ को गाली देने से अच्छा है पेहेल ख़ुद को सुधारे. वोट देने तो जाते हो नही - सिर्फ़ गलिया देने आ जाते हो. नेट उसे चुनो जो देश के काम आए. 100 प्रतिशत मतदान होगा तो ही भारत का भला होगा. ऐसा नही है के सभी नेता ख़रा होते हा. और अगर है तो ख़ुद न बन जाइये. हम आपके साथ है. घर पर कोँपूटेर पर गालियालीखं लिखना आसान है. चुनाव लाडिए और जीटीए. पेहेली बार ना सही पर कभी तो जीतोगे. तब देश के बारे मेई ज़्यादा बेहेतार सोच पाओगे.
Bhartiy Bharat
Dec 05, 2008
जब देश के नेताओ के परिवार वालो को आंतकवादी सामूहिक रूप मरेगे तब इन्हे पता चलेगा की आंतकवाद से जनता कितनी पीड़ित है. आम लोगो की तकलीफ़ इन्हे नही दिखती है, नेता ओर इनका परिवार तो सुरक्षा मे रेहता है और जनता असुरक्षित क्या यही प्रजातंत्र है. देश के नागरिको को स्यम भ्रष्टाचार ओर भ्रष्ट नेताओ को हटा होगा तो हो देश आगे बड़ेगा.
MAHENDRA PANWAR INDORE
Dec 05, 2008
जीतने भी सेलेबरीटीस हैं, उनका सिर्फ़ एक ही मक़सद हैं और वोह है अपने लिए जितनी शोहरत हासिल हो कर लेने का और लता जी भी इसके कोई अपवाद नही हैं|
sd sd
Dec 05, 2008
मे सबसे पहले सचिन और लता से पूछना चाहुगा की उन्होने तब क्यो नही आवाज़ उठाई जब उत्तर भारती पर हमले हो रहे थे. नाना पाटेकर, गोविंदा जैसे लोग हिंदी फ़िल्मे से आगे आए और उत्तर भारतीयो पर हमले को जायज़ बता रहे थे. ये है सब आंतरिक आतंकाबाड़ियो के समर्थक. पैसे वाले लोग मोमबटि जलने से कूचा नही होगा, ये वो लोग है जो मतदान मे भाग नही लेते और सिर्फ़ गली देते है की स्यस्टें ख़तम है. राज ताकरे तो एक कंधा था मुंबई पोलिसे एक बिहारी लरके को मरने के लिए तोप चला रहीओ थी आज आतंकवादियो के सामने हवा निकल गयी. अगर कमांडो नही होते तो मुंबई नही बचती. सो सचिन हम भी भारतीया है सिर्फ़ मुंबई वाले ही नही. हमारे पर भी हमला हुआ था तब आप चुप थे. आख़िर क्यो....
ashok kolkata
Dec 05, 2008
बड़ा ही महत्वपूर्ण क़दम है भारत की देशभक्ति जाग जाती है तो बड़े से बड़े आतंकवादी ढेर हो जाते है देश भक्ति का जज़्बा भारत के हर नागरिक मे जगाओ जय भारत
pawan kumar jaipur
Dec 05, 2008
मुंबई के जनता का स्वागत है की अब वोह इन झूठे आतंकी नेताओ को पहचान लिया | जय जनता !जय हिंद!
lata India
Dec 05, 2008
विकास चुप र्ो और अपने राज्य के बारें मे सोचो और अपने नेता को गली देना महाराष्ट्र के नेता को नही और आपको कोई अधिकार ंही हमे भी गली देनी आती है
anand mumbai
Dec 05, 2008
एक बार शायद आप कुत्ते पर विश्वास कर लेना लेकिन नेताओं पर यक़ीन मत करना. बफ़ादारी मैं कुत्ट नेता से आगे है. देश की राजनीति वोह कीचड़ का दलदल है जिसमे आकर अच्छे अच्छे लोगों के मान काले हो जाते है. फिर देश की किसे चिंता रेहती है. सारा समय तो इसमे लग जाता है की कैसे 5 साल अपना पैया इतना इकट्ठा कर लो की पूरी ज़िंदगी 7 पुश्तें बैठ कर खाएं शायद येह नेता नही जानते की जो जनता इन्हे कुर्सी दिलवाती है वोही जनता समा आने पर इन्हे कुर्सी से उखाड्ड फेंक सकती है. येह बात ध्यान रहे. देशमुख और पटिल
Prashant Saxena Bangalore
Dec 05, 2008
आ वक़्त है की जनता की एक ऐसी फ़ौूज़ तैयार की जाय जो इस देश भ्रष्ट्राचार उसी प्रकार भगाए जिस प्रकार से अँग्रेजन को भगाया जा. क्यकि आज रश्रा के पतन का यह भ्रष्ट्राचार ही है. देश के वे युवा जो आज नेताओ सेन घृणा कर रहे है, संकल्प करे की आजीवन कभी भी रिश्वत के धन को छ्हूएनगे नही. ऐसे संकल्पो से रश्रा की मज़बूत नींव बनेगी.
jaydeep singh chandauli
Dec 05, 2008
देर से हे सही हम हिंदुस्तानी जागे तो सही....... देशमुक्, पाटिल , और राज ताकरेय जैसे देश के दुश्मनो को हमरी जनता कभी माफ़ नही करेगे.
ravi mumbai
Dec 05, 2008
किसी आतंकी को सजा देना भगवान का काम है, लेकिन भगवान के साथ उसकी मुलाकात तय कराना हमारी जिम्मेदारी- भारतीय सेना, सरे हिंदुस्तान लोग(हिंदू,मुसेलीम.....)
suryaprakash NOIDA
Dec 05, 2008
इन नेताओ से भ्र स्ट हिंदुस्तान मे कोई नही है. इनका बस चले तो ये हिंदुस्तान को बेच खाए,ग़रीब जनता के नसो मे चलती ख़ून की आख़िरी बूँद को चूस ले,जातिधर्म के नाम पर राजनीति कर अपनी दुकान चलाने वाले ये ठेकेदार अब निर्दोष जनता की लाशो और वीर जवानो की शहादतो पर भी अपनी राजनीतिक रोटी सेकने मे लगे है. इन नेताओ को को यह सबक देना होगा की अब देश की जनता जाग गयी है. समय गवाह है की जब जनता जागती है तब क्रांति होती है. नया इतिहास लिखा जाता है. नया सबेरा होता है. - जय हिंद
SATISH CHANDRA MISHRA ALAMBAGH LUCKNOW
Dec 04, 2008
आप सब नेता जनता की गलियों का बुरा मत मानिए आपने काम ही ऐसा किया है (माफ़ कीजिए कोई काम नहीं किया है). मुंबई की घटना ने साबित किया है की आप लोग कितने निक्कम्मे हैं. सिर्फ़ वोटो के चक्कर मैं सही निर्णय लेने से डरते हैं. अकर्मणयता को आपने अपना गहना बना लिया है. पूरी दुनिया में हमारे नेताओं और नोकरशाही की अकर्मणयता की चर्चा हो रही है. यक़ीन मानिए एक आम आदमी जब दिन भर मेहनत करके घर आता है तो उसे चैन की रोटी के साथ तनाव रहित कुछ पल चाहिए होते हैं. लेकिन जब वो दिनभर मेहनत भी करे और आतंकवादियों की मार भी सहे और यह सब बार बार होता रहे तो यह वो कब तक सहन करे. इन सब त्रासदियों के बीच वह अपने किसी प्रियेजन को खो बैठे तो वो कब तक सहन करे . नेताओं के खिलाफ़ इतना ग़ुस्सा शायद आज़ादी के वक़्त भी नहीं देखा गया था. इसीलिए मेरी आप नेताओं से गुज़ारिश है की कर्मत्ता को अपनी दिनचर्या बना लीजिए. यह वही जनता है जो आपको अकर्मणयता पर ग़ुस्सा दिखा रही है और खुल कर गालियाँ दे रही है और यह वही जनता है जो आपके समय पर लिए गये सही निर्णयों पर आपको सिर आँखों पर बैठयगी. मैं नेताओं से यह कहना चाहता हूँ की आप शुक्र कीजिए की जनता ने अभी सिर्फ़ अपना ग़ुस्सा दिखाया है. इस ग़ुस्से से आगे कुछ और दिखाने की नौबत ना आने दीजीए नही तो येह देश के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा. और अंत में एक बात और जनता को बाँटने की कोशिश मत कीजिए . जिस जनता को हमारे नेताओं ने (हर पार्टी के नेताओं ने) कई बार बाँटने के प्रयास किए हैं वे सब प्रयास निरर्थक साबित हुए हैं. यह इस दर्दनाक घटना का सकारात्मक पक्ष है
Rakesh Minocha Delhi
Dec 04, 2008
अब बारी है कुछ करने की....................
amit karwa aurangabad
Dec 04, 2008
कुत्ता तो वफ़ादार होता है नेता तो गदार होता है मिस्टर सी म साहेब जो साहिदों को ऐसा कहे वह सबसे बड़ा गद्दार है
Pushpendra Jain chhatarpur
Dec 04, 2008
ये विरोध सही हे पर देश को चलाना हे तो लीडर तो चाहिए नही तो देस मे शांति के हालत बिगड़ जाएगे पर मेरा मानना हे की इससे नेताओ को जनता के बारे मे सोचना पड़ेगा और वो जनता के हित का सोचेगे क्योकि ढयान ना देने का नतीजा वो देख रहे हे
Praveen Gupta Indore
Dec 04, 2008
सिर्फ़ भाषणों ओर राय देने से कुछ नही होगा फिर तुम मे और नेताओ मैं फ़र्क क्या वो भी भाषण देते है और आप भी यही कर रहे हो लिखने को सब लिख देते है आगे कोई नही आना चाहता इसे लिए वो नेता हैं और आप जनता
pushkar kaushik delhi
Dec 04, 2008
हम आज़ादी के लायक नही है हम शासन करना नही जानते हम केवल ग़ुलामी के लायक है तभी हम 400 साल ग़ुलाम रहे
www.mayihelpyouonline.com Lucknow
Dec 04, 2008
बकवास बकवा नौसेना की ग़लती सज़ा नेताओ को बहुत ग़लत बात हैं देशमुख बहत अच्छा नेता है
khalid lucknow
Dec 04, 2008
हम आयकर इसलिए देते है की देश का विकास हो , इसलिए नही की इन नेताओ की भोग विलास पर और इनकी निगरानी पर ख़र्च हो,इनकी सुविधा ,सूरक्चा तुरंत हटा ली जानी चाहिए, तभी इनको आम नागरिक का दर्द क्या होता है मालूम पड़ेगा,इनको तो आतंकवादी भी मरना पसंद नही करते ,उनको मालूम है की ,इनकी औकत कुत्तो से ज़्यादा नही है, सुनील शुक्ला अल्लाहाबाद
sunil shukla allahabad
Dec 04, 2008
बड़ी मुस्किल से आग लगी हे सीने मे इसे बुजने ना डेन्न 60 साल बाद तो आब जोस मे आय हे हम्म
jitendra gupta bhopal
Dec 04, 2008
पहले हमारे पूर्वज़ो ने गोरे अँग्रेज़ो से लड़ाई लड़ी, अब हमे काले अँग्रेज़ो (नेताओ) से लड़ना है . देश की आम जनता अब जाग गयी है. जय जवान जय जनता !!
ashish allahabad
Dec 04, 2008
ये सब हमारे नेता के लिए सुन कर शांति मिल रही है इन क साथ एसा होना चाहीय
vikas ellenabad
Dec 04, 2008
सबसे पहले मे उन सिपाहियो को आभार ब्यक्त करता हू जिन्होने अपने फ़र्ज़ को बख़ूबी निभाया है . अब अपने नेताओ के बारे मे क्या काहू सले कुर्सी के भूके कुते अपने कुर्सी के लिया अपने भारत माता को इन आतंकी कुत्तो को अपमानित करने का मोका दिया उनसे कहना चाहता हू की अब बहुत हो गया. हम अपनी माता का ख़्याल ख़ुद रख लेगे. हम अब आपके भरोसे नही .
uttam kolkata
Dec 04, 2008
किसी समय मैं हमारा देश सोए की चिड़िया कहलाता था ,लेकिन अब ये आतंकबदी इसे खोखला करना चाहते है, पर हम एसा नही होने देगे| और इन नेताओ को बोलो की देश चलाना इनकी बस की बात नही रही है| ये नेता घर रहे , और दल रोटी खाए| कोई की ये अब किसी काम के नही रह गये है. नई पीढ़ी ही देश का उज्जबल वभिश्य है|
neha delhi
Dec 04, 2008
हमारे नेताओ मे इतनी ताक़त ही नही हैं की वोह पाकिस्तान से दो दो हाथ कर पाए क्यूंकि कुच्छ को ओोते बनक की चिंता हैं और कुच्छ को अपने तेररोरिस्त दामाद की जो उनके लिए पुब्लिक को डरने का काम करते हैं अगर सरकार मे दम हैं और उसे लगता हैं की उसमे पाकिस्तान से ज़्यादा दम हैं तो आज ही पाकिस्तान पर =हल्ला बोल=
sanjay kolkatta
Dec 04, 2008
इससे हमारे नेताओ को भी सबक लेना चाहिए ओर राजनीति छोड़ सभी एक साथ हो कर देश के लिए लड़े. ओर पकिस्तान को उसकी करनी का क्रारा जबाब दे. नही सारे नेता चुड़िया पहन कर घर मैं बैठे उन्हे देश को चलाने का कोई हक नही है.
DEEPAK GUWAHATI
Dec 04, 2008
शहीदों को हमारा सलाम राजनीति करने वाले नेताओ को शरम आनी चाहिए और इन नेताओ की रेलिओ मे मत जाइए हिंदोसतान ज़िंदाबाद जै हिंद
lakhwinder singh korea
Dec 04, 2008
नेता कभी नही सुधारनेवाले चाहे कितनी भी कोशिश कर लो, इनके वादे और बातो का कोई भरो नही, आतंकवादी हमले के बाद सभी नेताओ के असली चेहरे सामने आ गये, सबको सिर्फ़ अपनी पब्लिसिट और पैसे ( करीयर) के पड़ी हैं . जनता जिये या मारे, इनको क्या फ़र पड़ता ह... एन सभी नेताओ के खिलाफ़ पूरे देश मे इस तरह का जान सैलाब होना चाहिए ना की सिर्फ़ मुंबई मे..... इन्हे हम चुनते है देश और देशवासियो की सुरक्षा के लिए... लेकिन ये सिर्फ़ अपने आगे पीछे सुरक्षा लेकर चलते हैं . इनकी सेकुरिती ( सुरक्षा) हटा देनी चाहिए. जय हिंद |
Ishant Mumbai
Dec 04, 2008
यार नेता लोगो को आतंकवादी क्यों मरेगे वो तो उनकी हेल्प करते है आतंक फैलाने मे..... एसलिए तो क़ानून नही बनाते है ...... देश के सबसे बड़े आतंकवादी तो हमारे नेता लोग है पार्टय के क्म कोई नही है.
Mahendra iiit roorkee
Dec 04, 2008
मुंबई मे हूई इस आतंकवादी घटना की मे घोर निंदा करता हू और नेताओ को कहना चाहता हू की अब इस पर राजनीति छोड़कर आतंकवाद से निपटने के लिए कड़े क़दम उठाए उनके इस क़दम केलिए पूरा देश उनके साथ है
RAVISH VIJAYVARGIYA INDORE (M.P.)
Dec 04, 2008
पहले हमारे पूर्वज़ो ने गोरे अँग्रेज़ो से लड़ाई लड़ी, अब हमे काले अँग्रेज़ो (नेताओ) से लड़ना है . देश की आम जनता अब जाग गयी है. जय जवान जय जनता !!
Sanjay Ballia
Dec 04, 2008
वक़्त बद्ल गया है भ्रासत नेताओ, अब जनता जाग गई है, ओर इस बात का इतिहा गवाह है, के जब कही भी एक आम आदमी जागता है तो समझ लो के अब भोर होने वाली है , ए देस के गद्दारो तुम्हाई आब ख़ैर नही.
PRAVIN-EK AAM HINDUSTANI MUMBAI
Dec 04, 2008
ये सब सही है इन हरामम खोर नेताओ क साथ ऐसा होना चाहीए इन से तो कूता हे अच्छा हे सब कुछ खराब केर दिया इन चोरो को गोली मार देनी चाहीए
vikas ellenabad
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