संपादक की पसंद

16 मई, 2013 की तारीख आईपीएल क्रिकेट के दीवानों को लंबे समय तक याद रहनी चाहिए।

‘कयामत से कयामत तक’ बस एक फिल्म ही नहीं थी, वो बॉलीवुड के इतिहास में एक नए युग का आगाज था, जिसमें मासूम प्रेम-कहानियां में सुमधुर संगीत, गीतों को पिरोया गया था।

क्या हमारे देश की अदालतों में बरसों-बरस फैसले की बाट जोह रहे करोड़ों मुकदमों में फंसें लोगों को ऐसी राहत मिल सकती है?

सब के सब एक साथ टपके। बरसों से देख रहा हूं। हर होली पर इनकी सूरत दिख जाती है। वैसे सब सालें साल भर चंपत रहते हैं, अरे मतलब जुगाड़ पानी में लगे रहते हैं।

हाल के दिनों में पुलिस से जुड़ी घटनाओं का देशभर में चर्चा का विषय बनना संकेत है कि देश की पुलिस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

बचपन में आप-हम सभी ने एक कहानी कई बार सुनी-पढ़ी, रॉबिनहुड की कहानी।

17 सालों से प्रादेशिक दलों की राजनीति के शिकार रहा रेल मंत्रालय और रेल बजट कांग्रेस के हाथ आकर भी निराश कर गया।

हैदराबाद ब्लॉस्ट के अगले दिन संसद में जो असंसदीय हुआ, वो दरअसल आम आदमी की खीज दिखती है। सरकार के खिलाफ, गृहमंत्री के खिलाफ।

कभी मुंबई पुलिस की शान रहे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट जिस तरह से पिछले कुछ सालों में विवादों में आए, वो चौकानें वाला है।

26 जनवरी को हम भारतीय गणतंत्र की 64वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, और खबर आई की प्याज के दाम एक बार फिर देश भर की थोक मंडियों में दुगुने हो गए।

यहां तक की पार्टी संविधान में बदलाव करने की खबरें तक आई थीं। लेकिन जब बोतल से जिन्न निकला तो वो कोई और था।

हर जाता साल हमें कुछ खट्टे-मीठे अनुभव देकर जाता है। कुछ सिखाकर जाता है। कुछ समझाकर जाता है।

शायद अब हम सभी को उस बहादुर बेटी से, उस बहादुर बहन से माफी मांग लेनी चाहिए, फिर वो चाहे आज पार्थिव रुप में हमारे बीच नहीं है।

अपने 75वें जन्मदिन के दिन जब रतन टाटा ने रिटायरमेंट का एलान किया, तो रतन टाटा भारतीय बिजनेस वर्ल्ड में एक इतिहास रच चुके थे।

दिल्ली गैंगरेप पर पूरा देश सन्न है, गुस्से में है, शर्मिंदा भी है कि हम ऐसे देश में रह रहे हैं जहां देश की राजधानी में सरेआम बलात्कार होते हैं।






















